ग्वालियर में PM आवास की पानी टंकी में मिलीं 5 मरी छिपकलियां, 1300 फ्लैट्स में सप्लाई, दहशत में रहवासी
ग्वालियर. इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौतों के बीच ग्वालियर में भी पीने के पानी में बडी लापरवाही सामने आई है। मानपुर क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने फ्लैटों की पानी की टंकी में मरी हुई पांच छिपकलियां मिलीं है। टंकी से करीब 1300 फ्लैटों में रहने वाले परिवारों को पानी की सप्लाई की जाती है। पानी की टंकी में मरी छिपकली मिलने से रहवासी भडक गए। नगर निगम पर गंभी लापरवाही का आरोप लगा रहे है। लोगों का कहना है कि टंकी की नियमित सफाई नहीं हुई है। ढक्कन ठीक से बंद न रहने से छिपकली गिरक मरीं, क्या नगर निगम के अफसर भागीरथपुरा बनाना चाहते है।

टंकी का ढक्कन खोला तो मरी हुई छिपकलियां पडी हुई थी
स्थानीय लोगों का कहना है कि फेस-1 में ब्लॉक ई-52 की पानी की टंकी से आने वाले पानी की क्वॉलिटी पर शक हो हा था। पानी में बदबू औ गंदगी महसूस होने के बाद कुछ लोगों ने टंकी की जांच की। टंकी का ढक्कन खोला तो अंदर मरी हुई छिपकलियां पडी हुई थी। इसके बाद लोगों ने टंकी से उन्हें बाह निकाला। पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी बना लिया। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर भी सामने आया है। टंकी में छिपकलियां मिलने की खबर फैलते ही परिसर में दहशत का माहौल बन गया। लोगों को डर है कि कई दिनों से यह पानी उनके घरों में सप्लाई हो रहा था। संभव है कि वे अनजाने में दूषित पानी पी चुके हों।

रहवासियों ने कहा पिछले 2 साल से नहीं हुई सफाई
फ्लैटों में रहने वाले लोगों का आरोप है कि पिछले 2 साल से वे यहां रह रहे है। छत पर बनी पानी की टंकी की नियमित सफाई नगर निगम नहीं करा रहा है। कई बार उन्होंने शिकायत भी दर्ज कराई लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। कुछ रहवासियों का कहना है कि टंकी के ढक्कन की स्थिति भी ठीक नहीं है जिससे बाहर से कीडे-मकोडे या अन्य जीव अंदर गिर सकते है। उनका आरोप है कि अगर समय पर टंकी की सफाई और रखरखावा किया जाता तो ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होती।

अधिकारियों से मुलाकात के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
बताया जा रहा है कि हाल ही में कॉलोनी के कुछ प्रतिनिधियों ने इस समस्या को लेकर नगर निगम के अधिकारियों से मुलाकात भी की थी। उस समय अधिकारियों ने टंकियों की सफाई और व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया था, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

