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ग्वालियर महापौर के सामने अविश्वास का संकट, 5 पार्षद भाजपा में शामिल

ग्वालियर. ज्योतिरादित्य सिंधिया के समख पांच पार्षदों ने अपने समर्थकों के साथ भाजपा की सदस्यता ले ली। इनमें दो कांग्रेस और दो निर्दलीय और एक बसपा पार्षद है जो अभी तक महापौर को समर्थन दे रहे थे इसके चलते अब नगर निगम परिषद की सूरत बदल गई है। अब परिषद में भाजपा के 41 और कांग्रेस के 25 पार्षद बचे है। परिषद में भाजपा विपक्ष में है और विपक्षी पार्षदों की बढती संख्या के साथ ही महापौर के सामने अविश्वास प्रस्ताव का संकट खडा हो गया है, क्योंकि विपक्ष के तीन-चौथाई पार्षद होने पर महापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है।
शाम को टप्पा तहसील मुरार में आयोजित मेगा शिविर में वार्ड 19 से कांग्रेस पार्षद कमलेश तोमर और पूर्व पार्षद बलवीर तोमर ने 400 समर्थकों के साथ केंद्रीय मंत्री सिंधिया के समक्ष भाजपा की सदस्यता ली। इसके बाद देर रात जयविलास पैलेस में वार्ड 62 की कांग्रेस पार्षद गौरा अशोक गुर्जर सहित वार्ड 23 से बसपा पार्षद सुरेश सोलंकी, वार्ड दो से निर्दलीय पार्षद आशा सुरेंद्र चौहान और वार्ड छह के पार्षद दीपक मांझी ने भी भाजपा की सदस्यता ले ली।
इन पार्षदों के भाजपा में आने से पहले परिषद में विपक्ष यानी भाजपा के 34 और दो निर्दलीय मिलाकर 36 पार्षद थे, जबकि सत्ता पक्ष यानी कांग्रेस के 25, एक बसपा और चार निर्दलीय मिलाकर 30 पार्षद थे। रविवार को जब पार्षद भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर रहे थे, उस समय सभापति मनोज सिंह तोमर और नेता प्रतिपक्ष हरि पाल नजर नहीं आए।
विपक्ष में 44 पार्षद तो ला सकते हैं अविश्वास प्रस्ताव
नगर निगम एक्ट के मुताबिक तीन-चौथाई पार्षद मिलकर महापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं। इसमें वोटिंग होने की स्थिति में महापौर को हटाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा सकता है। ग्वालियर नगर निगम में 66 पार्षद हैं। ऐसे में तीन चौथाई का आंकड़ा 44 होता है। भाजपा के 41 पार्षद वर्तमान में हो चुके हैं, क्योंकि पार्षदों पर दल-बदल कानून लागू नहीं होता है। इसके चलते अब महापौर के पद पर खतरा मंडरा रहा है। यदि तीन पार्षद और टूटकर भाजपा में चले जाते हैं, तो महापौर का हटना तय हो जाएगा।

 

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