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कला वीथिका में वर्ल्ड रिकॉर्डधारी चित्रकार हरिकृष्ण कदम की त्रिदिवसीय चित्र प्रदर्शनी में कला.परिचर्चा

ग्वालियर. चित्रकार हरिकृष्णदास कदम की तीन दिवसीय चित्र प्रदर्शनी के दूसरे दिन विभिन्न कलाओं के सिद्धहस्त कलाकारों के बीच कला-परिचर्चा के लिये परिचर्चा हुई। ऐसे में परिचर्चा में कई सकारात्मक विचार सामने आये, इन सकारात्मक विचारों पर अमल लाने का प्रयास किया जायेगा। इससे ग्वालियर में कला आगे बढ़ेगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व अपर कलेक्टर प्रभात रंजन उपाध्याय ने की एवं मुख्य अतिथि नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर शिशिर श्रीवास्तव थे। प्रमुख वक्ताओं ने भोपाल से पधारे माजा कोयने सामाजिक पत्रकारिता पुरस्कार प्राप्त पत्रकार जयंतसिंह तोमरए अखिल भारतीय साहित्य परिषद के पूर्व क्षेत्रीय संगठनमंत्री जगदीश गुप्त महामनाए वेद विचारक व व्याख्याकार संजीव शर्माए रंगभूमि संगीत अकादमी के निदेशक प्रसिद्ध संगीतकार व गायक नवनीत कौशल थे। कार्यक्रम का संचालन दुष्यंत कुमार पुरस्कार प्राप्त प्रसिद्ध साहित्यकार रौशन मनीष ने की। कार्यक्रम का प्रारंभ वक्ताओं के परिचय और माल्यार्पण से हुआ तत्पश्चात हरिकृष्ण कदम की कलाकृतियां सभी अतिथियों को स्मृति चिह्न स्वरूप प्रदान की गईं।
संचालन में कला के सातों स्वरूपों पर और उनकी उत्पत्ति पर प्रकाश डालते हुए मानव जीवन में कलाओं की आवश्यकता और उपयोगिता बताई। नवनीत कौशल ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में संगीत के फ्यूजन व संगीत की साधना की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। जगदीश गुप्त महामना ने शब्द प्रयोग में सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया और बताया कि प्रत्येक शब्द का एक विशिष्ट निहितार्थ होता है और उस अर्थ के संबंध में ही उसका प्रयोग किया जाना चाहिए। ग्वालियर में विभिन्न कलाओं के प्रतिनिधियों के साथ पहली बार संपन्न हुये इस कलाविमर्श को अनूठा आयोजन बताया और आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन होते रहेंगे।उन्होनें यह भी कहा कि कलाकारों को उनकी कला का उचित मूल्य नहीं मिलता किंतु वही कला जब बाजार में आती है तो मूल्यवान हो जाती है और उसका आर्थिक लाभ बाजार उठाता है इसलिए प्रयास होना चाहिए कि कलाकारों को आर्थिक प्रोत्साहन मिले। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री प्रभात रंजन उपाध्याय जी ने कला वीथिका के पुराने वैभव को याद करते हुए कई संस्मरण सुनाये और कलाप्रेमियों से आह्वान किया कि वे कला वीथिका में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित भी करें और अन्य लोगों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में सम्मिलित भी हों। आभार प्रदर्शन हरिकृष्ण कदम ने किया। कार्यक्रम में संजय धूपर ने रफी साहब का गीत भी गाया जिसका उपस्थित कलाप्रेमियों ने आनंद लिया।

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