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UPPSC, RO-ARO भर्ती परीक्षा पर हंगामा क्यों बरपा

नई दिल्ली. उत्तरप्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के नॉर्मलाइजेशन के खिलाफ आन्दोलित छात्रों में आक्रोश चरम पर है। 11 नवम्बर यानी सोमवार को हजारों की तादाद में छात्र यूपी पीएससी के खिलाफ सड़कों पर है। छानों ने बताया है कि पिछले 2 वर्षो से आयोग परीक्षा कराने में असफल रहा है। इसी साल की शुरूआत यानी जनवरी 2024 में आयोग ने उत्तरप्रदेश सिविल सर्विसेज का नोटिफिकेशन जारी किया था। जिसकी परीक्षा मार्च महीने में लंबित थी। जिसको फिर अक्टूबर महीने के लिये टाल दिया गया था।
इसके बाद आयोग की एक और परीक्षा समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी 11 फरवरी को आयोजित की गयी थी। परन्तु पेपर लीक होने के कारण से इसको निरस्त कर दिया गया था। इन दोनो परीक्षाओं को अक्टूबर महीने में आयोजित करने के लिये प्रस्तावित किया गया था। फिर अचानक आर-ओ, एआरओ को दिसम्बर में कराने की घोषणा की जाती है। इसके साथ ही छात्रों 2 शिफ्ट में पेपर करने के लिये कहा गया। जिससे छात्रों में गुस्सा है।
छात्रों का तर्क है कि दो शिफ्ट में पेपर होने से नॉर्मलाइजेशन होगा जिसके कारण अच्छे छात्रों को भुगतना होगा, अर्थात एक दो शिफ्ट में पेपर होने के वजह से एक शिफ्ट में सरल एक शिफ्ट में कठिन प्रश्न होंगे जिसके कारण आयोग नॉर्मलाइजेशन करने का काम करेगा जिससे अच्छे छात्रों के छटने की संभावना रहेगी, साथ ही साथ भ्रष्टाचार बढ़ेगा. छात्र लगातार इसी का विरोध कर रहे है. उनकी मांग है कि पेपर एक शिफ्ट में हो और एक दिन में हो. वहीं, आयोग का कहना है कि हमारे पास केंद्र उपलब्ध नहीं है जिससे एक साथ 6 लाख अभ्यर्थ‍ियों का पेपर करवा सकें. छात्रों का तर्क है कि इससे पहले आयोग इससे ज्यादा छात्रों की परीक्षाएं करवाता आया है. यहां हम पूरे मामले में हो रहे अंतर्वि‍रोध के बारे में बता रहे हैं.

 

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