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क्या बागी गुट ही असली TMC होगा

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की हार के बाद पार्टी के अन्दर हुई नाराजगी अब खुले विद्रोह में बदलती नजर आ रही है। लोकसभा में टीएमसी के 19 सांसदों द्वारा अलग गुट बनाने की मांग किये जाने के बाद पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है।
टीएमसी के बागी सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अपने अलग गुट की मांग को आगे बढ़ायेंगे। यदि बागियों को पर्याप्त संख्या का समर्थन मिलता है। लोकसभा में टीएमसी की मान्यता और नेतृत्व को लेकर बड़ा फैसला सामने आ सकता है। टीएमसी में बगावत की आग एक दिन में नहीं भड़की । इसके पीछे राजनीतिक महत्वकाक्षायें, पद और पॉवर की चाहत की लम्बी कहानी है। इसमें उन सांसदों के नाम है। जिन्होंने आधिकारिक तौर पर टीएमसी से अलग गुट बनाने की प्रक्रिया का अगाज किया था। इस चिट्ठी में कुल 19 सांसदों के हस्ताक्षर है और यह पत्र भी 18 मई को लिखा गया था।
असली टीएमसी क्या बागी गुट ही बन जायेगा
आपको बता दें कि लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद है। 19 ने पहले ही मंसूबे साफ कर दिये है। इसमें सयानी घोष का नाम नहीं था। सयानी घोष ने बाद में पाला बदलने का प्लान बनाया। सबसे आखिरी में बागवत की कल्याणी बनर्जी ने अगर कल्याण बनर्जी और सयानी घोष को भी जोड़ दें। बागियों की संख्या 21 हो जाती है। जो कि टीएमसी के कुल सांसदों की संख्या के दो तिहाई से भी ज्यादा है। ऐसे में लोकसभा स्पीकर बागियों को ही असली टीएमसी घोषित कर दे ंतो हैरानी नहीं होगी। ममता बनर्जी से पार्टी छीनने के लिये बागियों का सिर्फ 19 सांसदों का समर्थन चाहिये।

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