MP में मनमर्जी से कई अस्पतालों में सेवा नहीं दे पाएंगे पैथोलाजिस्ट
भोपाल. प्रदेश भर में निजी पैथालाजिस्टों की मनमर्जी पर रोक लगेगी। वह एक या दो निजी पैथोलाजी केंद्र में ही पैथोलाजिस्ट के तौर पर सेवा दे सकेंगे। स्वास्थ्य संचालनालय इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर रहा है। शासन से स्वीकृति के बाद इसे लागू किया जाएगा। अभी स्थिति यह है कि एक पैथोलाजिस्ट के नाम से चार से भी ज्यादा केंद्र पंजीकृत हैं। पैथोलाजिस्ट इन केंद्रों में जाकर जांच नहीं करते तो भी उनके नाम और हस्ताक्षर से जांच रिपोर्ट जारी हो जाती है, जो गैरकानूनी है।
सबसे ज्यादा गड़बड़ निजी अस्पतालों में हो रही है। सभी अस्पतालों में पैथोलाजी जांचें होती हैं, पर कुछ बड़े अस्पताल छोड़ दें तो बाकी जगह पैथोलाजिस्ट नहीं हैं। इसी तरह से छोटे पैथोलाजी केंद्रों में भी कोई पैथोलाजिस्ट नहीं रहता। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है जांच की गुणवत्ता मापदंड के अनुसार रहेगी। इसके पहले राज्य सरकार ने निजी अस्पतालों में काम करने वाले डाक्टरों के लिए इसी तरह का नियम पिछले वर्ष बनाया था। अब एक डाक्टर सिर्फ एक नर्सिंग होम में ही बतौर रेजीडेंट पंजीकृत हो सकता है। पहले एक डाक्टर का नाम कई नर्सिंग होम्स में बतौर रेजीडेंट दर्ज था। भोपाल में भी सीएमएचओ द्वारा कराई गई जांच में पता चला था कि कुछ डाक्टरों के नाम 15 अस्पतालों में पंजीकृत हैं।

