प्रधान आरक्षक भटेले को मिला राष्ट्रपति पदक
ग्वालियर. वर्ष 2003 में उस समय ज्यादातर अधिकारी व जवानों ने कम्प्यूटर के बारे में सुना था, न हीदेखा था, और उससे अच्छी तरह परिचित नहीं थे। उस समय आरक्षक के पद पर रहते हुए सुरेन्द्र भटेले ने कम्प्यूटर की बेसिक नॉलेज पर हिंदी में किताब लिखी। साथ ही उस किताब से पुलिस के कम्प्यूटर ज्ञान के प्रणेता बन बैठे। इनकी किताब को कम्प्यूटर में रूचि रखने वाले अफसरों से लेकर कर्मचारियों तक ने पढ़ा और सीखा। इसके लेखन के बाद भटेले अपने विभाग में कम्प्यूटर बाबा के नाम से पुकारे जाने लगे। इसी वजह से वह अपने विभाग के कर्मचारियों की कम्प्यूटर से संबंधित समस्याओं को हल कर देते थे। 25 जनवरी को उन्हें राष्ट्रपति पदक की घोषणा विभिन्न सराहनीय कार्यों के लिए की गई है, लेकिन ग्वालियर पुलिस में इसकी वजह उनकी कम्प्यूटर पर लिखी किताब ही मानी गई है।
25 साल में नहीं मिली कोई सजा
पुलिस विभाग में 25 साल की सर्विस में अपने कार्य में हर समय वह सजग रहे हैं और आज तक कोई लापरवाही नहीं की है। जिसके कारण आज तक उन्हें एक भी छोटी-बड़ी सजा नहीं मिली है। जो भी कार्य अफसरों ने उन्हें दिया उसे वह समय से पहले ही पूरा करने का प्रयास करते है। यह भी उनका पुलिस विभाग में बेदाग नौकरी का रिकॉर्ड है।
तीन पुस्तकें लिखी हैं अभी तक
अपराधों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से सरल हिन्दी भाषा में ”कम्प्यूटर एण्ड सायबर क्राइम अवेयरनेस तैयार की गई है। जिसका प्रकाशन पुलिस मुख्यालय द्वारा किया गया। इस पुस्तक को प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षणार्थियों के लिये उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा भटेले पुलिस विभाग में अपनी ड्यूटी करते हुए कम्प्यूटर पर तीन पुस्तक लिख चुके हैं।

