MP ग्वालियर की सेंट्रल लायब्रेरी में संविधान की मूल प्रति
संविधान की प्रति की जानकारी
संविधान निर्माण के लिए 29 अगस्त 1947 को ड्राफ्टिंग का गठन हुआ
लगभग दो साल बाद 26 नवंबर 1949 पूर्ण रूप से संविधान तैयार हुआ
संविधान के निर्माण में कुल 284 सदस्यों का सहयोग रहा
संसदीय समिति ने 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया
उस समय संविधान की 16 मूल प्रतिया बनाई गई थी
संविधान की एक प्रति ग्वालियर की सेन्ट्रल लाइब्रेरी में रखी हुई है

ग्वालियर. आज देश 72वां संविधान दिवस मना रहा है। संविधान के बारे में सबने सुना है लेकिन कम ही लोग होंगे, जिन्होंने संविधान की मूल प्रति को देखा होगा। हम दिखा रहे हैं। इसकी मूल प्रति जो ग्वालियर की सेंट्रल लाइब्रेरी में रखी हुई है और इसके साथ ही इससे जुडे कुछ खास जानकारी भी यहां हम दे रहें हैं।

16 में से एक प्रति ग्वालियर मे
स्ंविधान लागू होने के समय देशभर में कुल 16 मूल प्रतियां जारी गयी थी। भारत सरकार ने एक मूल प्रति सिंधिया राजवंश को दी थी। 1950 में सिंधिया राजवंश को मिली यह मूल प्रति सन 1956 में महाराज बाड़ा स्थित सेंट्रल लायब्रेरी में सुरक्षित रखी गयी है। लायब्रेरी में यह प्रति 31 मार्च 1956 में आयी थी।

एक हजार साल है इन कागजों की उम्र
लायब्रेरी के प्रबंधकों का कहना है कि संविधान का यह कागज बेहत उच्च गुणवत्ता वाला हे। जिसकी उम्र एक जार साल तक रहेगी। हर साल संविधान दिवस, गणतंत्र दिवस के मौके पर लायब्रेरी में संविधान की मूल प्रति लोगों के देखने के लिये रखी जाती है। सामान्य तौर पर यह अलमारी में सुरक्षित रहती है। गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और संविधान लोग दिवस के मौके पर इसे देखने के लिये काफी लोग आते हैं।

इसे देख गौरव महसूस करते हैं
संविधान की प्रति को देखने आने वाले भी इसे अनमोल मानते हैं और साथ ही उनका कहना है कि इससे हमें देश के गौरवशाली संविधान के बारे में जानने का मौका भी मिलता हैं। इसके साथ वह इसे देखने पर अपने देश के गौरवशाली इतिहास पर गर्व करते हैं।

साल में 3 बार प्रदर्शित की जाती संविधान की प्रति
आज के दौर के लिहाज से संविधान की मूल प्रति का डिजीटल वर्जन तैयार हो गया है। लायब्रेरी की स्क्रीन पर डिजीटल वर्जन का प्रदशर््न हर वक्त किया जाता है। जिसे देखने के लिये दूर-दूर से लोग आते हैं। हालांकि सेंट्रल लायब्रेरी में संविधान की मूल प्रति साल में सिर्फ 3 बार देखने के लिये बाहर रखी जाती है।

संविधान दिवस मनाने का मकसद नागरिकों को संविधान के प्रति सचेत करना और समाज में संविधान के महत्व का प्रसार करना है। संविधान की असली कॉपी प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने हाथों से बेहतरीन कैलीग्राफी के जरिये इटैलिक अक्षरों में लिखी गयी थी। इसके हर पन्ने को शांति निकेतन के कलाकारों ने संजाया था।

