MP में कैंसर मरीजों की दवाएं Out of Stock, गरीब मरीजों का इलाज बीच में ही रुका
भोपाल. अमेरिका-ईरान के बीच बढते तनाव का असर अब भोपाल के कैंसर मरीजों पर भी पडने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे माल की सप्लाई रूकने से शहर के बडे सरकारी अस्पतालों में कीमोथेरेपी की जरूरी दवाएं पिछले तीन से चार हफ्तों से नहीं मिल रही है। फेफडे, गर्भाशय, मुंह और गले के कैंसर में इस्तेमाल होने वाली मुख्य दवाएं सिसप्लेटिन और कार्बोप्लाटिन बाजार में नहीं मिल रही है। इन दवाओं को बनाने में प्लैटिनम नामक धातु का उपयोग होता है जिसका कच्चा माल विदेशों से आता है।
एम्स भोपाल में गरीब मरीजों का इलाज बीच में ही रूका
एम्स भोपाल के ऑन्कोलॉजी विभाग में रोज 150 से 200 मरीज पहुंचते है। यहां भी कई जरूरी दवाएं आउट ऑफ स्टॉक बताई जा रही है। वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रतीक तिवारी ने बताया कि कीमो की दवाएं किसी भी रेट में नहीं मिल रही है। मरीजों का उपचार करने में परेशानी होती है। दवा न मिलने के कारण कई गरीब मरीजों का इलाज बीच में ही रूक गया है। दवाओं की कमी और महंगाई से परेशान मरीज अब इलाज के लिए इंदौर, नागपुर और मुंबई का रूख कर रहे है।
युद्ध के कारण विदेशों से कच्चा माल नहीं आ रहा
जीएमसी भोपाल के रेडियोथेरेपी विभाग के अध्यक्ष डॉ. हामिद गौरी ने बताया कि युद्ध के कारण विदेशों से कच्चा माल नहीं आ रहा है। कंपनियों के लिए दवा बनाना बहुत महंगा हो गया है। केंद्र सरकार ने कच्चे माल के दाम कम करने की पहल की है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सप्लाई सामान्य हो जाएगी और मरीजों को दवा मिल सकेगी।
जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल में हर दिन 300 से 350 मरीजों की ओपीडी होती है। यहां भी कई जरूरी कीमो दवाएं और इंजेक्शन स्टॉक में नहीं है। अस्पताल के प्रबंध निदेशक किसलय शर्मा ने कहा कि कुछ दवाओं की कमी थी अब धीरे-धीरे स्टॉक आ रहा है लेकिन कुछ दवाएं अभी भी बाहर से ही खरीदनी पड रही है।

