MP के कर्मचारियों को EL अवकाश के 300 दिन का मिलेगा भुगतान, सेवानिवृत्ति से पहले स्वयं जान सकेंगे कितना मिलेगा पैसा
भोपाल. मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिये लीव-इन-कैशमेंट राशि को लेकर आदेश जारी किया है। अभी कर्मचारी रिटायरमेंट या ड्यूटी के दौरान की मौत की स्थिति में मिलने वाली छुट्टी लीव इन कैशमेंट राशि का नुकसान स्वयं लगा सकेंगे। वित्त विभाग ने सभी विभागों, कार्यालयों और संबंधित अधिकारियों के लिये निर्देश जारी किये है। सरकार के फैसले को कर्मचारियों के लिये बड़ी राहत माना जा रहा है। क्योंकि लम्बे समय से अवकाश नगदीकरण की गणना को लेकर अलग-अलग विभागों में भ्रम और विवाद की स्थिति बन रही है। नये निर्देशों के बाद पूरे प्रदेश में एक समान प्रक्रिया लागू होगी।

अर्जित अवकाश का रिकॉर्ड रखें
वित्त विभाग के आदेश में सभी विभागों को यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि अवकाश नगदीकरण की गणना निर्धारित नियमों के मुताबिक ही की जायेगी। विभागों को निर्देश दिये गये है। कर्मचारियों के अर्जित अवकाश का रिकॉर्ड सही तरीके से रखा जाये। भुगतान के वक्त समान प्रक्रिया अपनाई जाये। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कर्मचारी को भुगतान में देरी न हो और गणना में गलतियां न हों।
300 दिन के अवकाश का मिलेगा भुगतान
राज्य सरकार के नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी को अधिकतम 300 दिनों के अर्जित अवकाश का नकदीकरण लाभ दिया जाएगा। अगर किसी कर्मचारी के खाते में 300 दिनों से अधिक अर्जित अवकाश मौजूद है, तब भी भुगतान केवल 300 दिनों तक ही सीमित रहेगा।
क्या होता है लीव इनकैशमेंट
सरकारी सेवा के दौरान कर्मचारियों के खाते में अर्जित अवकाश (ईएल) जमा होते रहते हैं। कई कर्मचारी अपने पूरे अर्जित अवकाश का उपयोग नहीं कर पाते, जिसके कारण उनके खाते में बड़ी संख्या में छुट्टी बचे रह जाते हैं। जब कर्मचारी रिटायर होता है या सेवा के दौरान उसकी मौत हो जाती है, तब उसके खाते में बचे हुए ईएल के बदले सरकार नकद भुगतान करती है। इसी भुगतान को अवकाश नकदीकरण या लीव इनकैशमेंट कहा जाता है। यह राशि कर्मचारियों के रिटायरमेंट लाभों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। कई मामलों में यह लाखों रुपए तक पहुंच सकती है।

