दतिया का रिजल्ट बदलेगा MP की राजनीति, बीजेपी जीती तो मोहन-खंडेलवाल का कद बढ़ेगा
दतिया. उपचुनाव का नतीजा 3 अगस्त को आएगा। यह सिर्फ एक विधानसभा सीट का फैसला नहीं करेगा, बल्कि बीजेपी-कांग्रेस के संगठन और प्रदेश के कई बड़े नेताओं की आगे की राजनीति पर भी असर डाल सकता है। सबसे ज्यादा नजर पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा पर है। दतिया लंबे समय से उनका राजनीतिक गढ़ रहा है, लेकिन 2023 का विधानसभा चुनाव हारने के बाद बीजेपी ने इस उपचुनाव में उनकी जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। बीजेपी जीते या कांग्रेस, नतीजे का एनालिसिस नरोत्तम की राजनीतिक ताकत और पार्टी में उनकी आगे की भूमिका से जोड़कर होगा। बीजेपी के लिए यह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की बड़ी चुनावी परीक्षा है। कांग्रेस के लिए नतीजा प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व, संगठन की ताकत और 2028 की तैयारियों का संकेत देगा।
टिकट बदलकर भी जीते तो संगठन की ताकत का संदेश
बीजेपी की जीत का पहला राजनीतिक संदेश नरोत्तम मिश्रा के टिकट बदलाव से जुड़ा होगा। पार्टी यह कह सकेगी कि दतिया किसी एक नेता का नहीं, बल्कि बीजेपी के संगठन का गढ़ है। टिकट बदलाव के बाद स्थानीय असंतोष की चर्चाएं भी सामने आईं। बीजेपी सीट जीतती है तो पार्टी कह सकेगी कि उम्मीदवार बदलने के बाद भी उसका संगठन और वोट आधार कायम है। इसका असर भविष्य के टिकट फैसलों पर पड़ सकता है। पार्टी दूसरी सीटों पर बड़े या स्थापित चेहरों को बदलने जैसे कठिन फैसले लेने में ज्यादा सहज हो सकती है।
जीत नरोत्तम की नई भूमिका का रास्ता खोलेगी
बीजेपी की जीत के बाद नरोत्तम को लेकर दो राजनीतिक संभावनाएं हैं। पहली, उनके बिना भी बीजेपी ने उनका पुराना गढ़ जीत लिया, यानी दतिया में पार्टी की ताकत किसी एक चेहरे पर निर्भर नहीं है। दूसरी, यदि टिकट नहीं मिलने के बावजूद वे चुनाव में सक्रिय रहे और पार्टी जीतती है तो संगठन और चुनाव प्रबंधन में उनकी उपयोगिता का दावा मजबूत होगा। ऐसी स्थिति में राज्यसभा, राष्ट्रीय राजनीति, संगठन या चुनाव प्रबंधन में बड़ी भूमिका के लिए उनकी दावेदारी बढ़ सकती है।

