MP के ई-टेण्डर घोटाले के सभी 6 आरोपी बरी
भोपाल. मध्यप्रदेश के 3 हजार करोड़ रूपये के बहुचर्चित ई-टेण्डर घोटाले में स्पेशल कोर्ट ने बुधवार को 6 आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने आरोपियों को बरी करते हुए कहा है कि अभियोजन अपने आरोप साबित करने में असफल रहा है। आपको बता दें कि भोपाल स्पेशल कोर्ट में पिछले 4 साल से यह मामला चल रहा था। इस मामले में कोर्ट में 30 अधिक गवाहों के बयान हुए थे। जिनमें से अधिकतर अंतिम गवाही में अपने बयान से पलट गये।
आपको बता दें कि इस मामले में तत्कालीन जल संसाधन मंत्री और वर्तमान गृहमंत्री के ओएसडी के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गयी थी।
क्या था मामला
मध्यप्रदेश का ई-टेंडरिंग घोटाला अप्रैल 2018 में उस समय सामने आया था जब जल संसाधन विभाग की तीन टेंडर को खोलते समय कंप्यूटर में एक सुरक्षा संदेश डिस्प्ले हुआ. जिसके बाद पता चला कि टेंडर में टेंपरिंग की जा रही है. ये भी पता चला था आरोपी ई-टेंडर की पोर्टल को हैक करके टेंडर में हेर-फेर कर पसंद की कंपनियों को काम देते थे. जिसके बाद तत्कालीन सीएम शिवराज के आदेश पर इसकी जांच EOW को सौंपी गई थी. ईओडब्ल्यू की जांच में पाया गया था कि जीवीपीआर इंजिनेयर्स और अन्य कंपनियों ने जल निगम के 3 टेंडर की बोली की रकम में 1769 करोड़ का बदलाव कर दिया था. ई-टेंडरिंग को लेकर ईओडब्ल्यू ने कई कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी.
इस प्रकरण में कौन थे आरोपी
इस हाईप्रोफाइल इस मामले में एमपी इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम के ओएसडी नंदकिशोर ब्रम्हे, ओस्मो आईटी सॉल्यूशन के डायरेक्टर वरूण चतुर्वेदी, विनय चौधरी, सुमित गोलवकर, एंटारेस कंपनी के डायरेक्टर एमएन और भोपाल के व्यवसायी मनीष खरे आदि आरोपी थे।
कोर्ट ने सभी आरोपी किये बरी
ई-टेण्डर के मामले की सुनवाई स्पेशल कोर्ट के जज संदीप कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट में चल रहा था। बुधवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ कोई भी आरोप साबित नहीं कर पाया है। कोर्ट के इस फैसले से ईओडब्ल्यू को बड़ा झटका लगा है।

