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MP की राज्य सकरार आज फिर से ले रही 5800 करोड़ रूपये का कर्ज, कुल देनदारी 5.06 लाख रूपये करोड़ के पार

भोपाल. मध्यप्रदेश की मोहन यादव के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने होली के दौरान 6300 करोड़ रूपये का कर्ज लेने के बाद मंगलवार को फिर से 3 नये कर्ज लेने का फैसला किया है। इन तीनों कर्जो की कुल राशि 5800 कराड़ रूपये है। जिसका भुगतान बुधवार को किया जायेगा। इन कर्जो के साथ चालू वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार द्वारा लिये गये कुल कर्ज का आंकड़ा बढ़कर लगभग 84,900 करोड़ रूपये तक पहुंच जायेगा। वही प्रदेश पर कुल देनदारी बढ़कर करीब 5 लाख 6 हजार 640 करोड़ रूपये हो जायेगी।
अलग-अलग समय के लिये जा रहे हैं कर्ज
मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म के माध्यम से मध्यप्रदेरा समेत कई राज्य सरकारें बॉण्ड की नीलामी कर कुल 45,900 करोड़ रूपये का कर्ज लेंगी। इस नीलामी में कर्नाटक 10 हजार करोड़ और तमिलनाडु 8 हजार करोड़ रूपये की उधारी लेगा। 10 मार्च 2026 को लिये जा रहे कर्ज 5800 करोड़ कर्ज में अलग-अलग अवधि के बॉण्ड शामिल है।
1- 1900 करोड़ रूपये का कर्ज 10 साल की अवधि के लिये,
2- 1700 करोड़ रूपये का कर्ज 14 साल के लिये।
3- 2200 करोड रूपये का कर्ज 21 वर्ष की अवधि के लिये लिया जा रहा है।
केन्द्र सरकार ब्याज मुक्त कर्ज उपलब्ध करा रही है
केन्द्र सरकार भी राज्यों को पूंजीगत खर्च बढ़ाने के लिये 50 साल का ब्याज मुक्त कर्ज उपलब्ध करा रही है। इसी वजह से राज्यों ने वित्त वर्ष की पहली तिमाही से ही अधिक उधारी लेना शुरू कर दिया है। एमपी में योजनाओं, उद्योग और कृषि में निवेश के साथ ही पुराने कर्ज के मूलधन और ब्याज के भुगतान के लिये भी बड़ी राशि की आवश्यकता बताई जा रही है।
होली से पहले लिया था 6300 करोड़ का कर्ज
होली से एक दिन पहले सरकार ने चार अलग-अलग कर्ज लेकर कुल 6300 करोड़ रुपए जुटाए थे। वित्त विभाग के नोटिफिकेशन के अनुसार
1800 करोड़ रुपए का कर्ज 9 साल के लिए,
1600 करोड़ रुपए का कर्ज 13 साल के लिए,
1300 करोड़ रुपए का कर्ज 15 साल के लिए,
1600 करोड़ रुपए का कर्ज 23 साल की अवधि के लिए लिया गया था।
यह एक ही दिन में चालू वित्त वर्ष का सबसे बड़ा कर्ज माना गया।
17 फरवरी को भी लिए थे चार कर्ज
राज्य सरकार ने इससे पहले 17 फरवरी को भी चार अलग-अलग कर्ज लिए थे। इनमें 1200 करोड़ रुपए (8 साल), 1400 करोड़ रुपए (13 साल), 1600 करोड़ रुपए (19 साल) और 1400 करोड़ रुपए (23 साल) की अवधि के लिए कर्ज लिया गया था। इन सभी कर्जों की अदायगी हर छह महीने में ब्याज भुगतान के साथ की जाएगी। 31 मार्च 2025 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में मध्य प्रदेश पर कुल कर्ज 4 लाख 21 हजार 740 करोड़ रुपए था, जो अब लगातार नई उधारी के कारण तेजी से बढ़ता जा रहा है।

 

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