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GWALIOR में 1911 में 78 लाख की लागत से बना था एशिया का सबसे बड़ा मिट्टी का डैम

ग्वालियर. भिंड के 41 और ग्वालियर के 238 गांवों की खेती को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के लिए 700 करोड़ रुपए की लागत वाली हरसी उच्च स्तरीय नहर परियोजना का काम जारी है। ग्वालियर जिले में इसका काम पूरा हो चुका है। बांध का पानी मुरार क्षेत्र में पहुंचाने के लिए जौरासी घाटी में 2.75 किलोमीटर लंबी और प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी टनल का निर्माण किया गया था। अब इस टनल से निकलकर पानी मुरार के गांवों तक पहुंच रहा है। उल्लेखनीय है कि नहर निर्माण में भ्रष्टाचार को लेकर 49 इंजीनियरों पर प्रकरण भी चला था

आजादी के बाद कई बड़े बांधों का निर्माण हुआ, लेकिन ग्वालियर का हरसी बांध आजादी से भी पुराना है। डबरा-भितरवार के 200 और मुरार के 40 गांवों की कृषि भूमि की सिंचाई और पेयजल का सहारा यह बांध अपने जमाने में एशिया के सबसे बडे़ मिट्टी बांध में शामिल रहा। जो ग्वालियर स्टेट की समृद्धि का सबसे बड़ा प्रतीक था। तब बांध के निर्माण में 78 लाख रुपए खर्च का अनुमान लगाया गया था। उस दौर में इतनी रकम काफी थी।

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