दतिया गबन प्रकरण में FIR पर रोक से हाईकोर्ट ने किया इंकार, याचिकाकर्ताओं की भूमिका संदिग्ध
ग्वालियर. हाईकोर्ट की एकलपीठ ने दतिया के शिक्षा विभाग में सामने आये 2.35 करोड़ रूपये के गबन के मामले में एफआईआर दर्ज करने की कार्यवाही में हस्तक्षेप से मना कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि शुरूआती जांच में याचिकाकर्ताओं की भूमिका संदिग्ध पायी गयी है। इसलिये एफआईआर दर्ज रना ही उचित होगा।
याचिकाकर्ता ने डीईओ के आदेश को हाईकोर्ट में दी चुनौती
मामले में गंगाराज जाटव -महेन्द्रकुमार शर्मा ने जिला शिक्षा अधिकारी के उस आदेश के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिये गये थे। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि बिना विभागीय जांच के सीधे आपराधिक मामला दर्ज करना कानून के खिलाफ है। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में बताया गया कि ट्रेजरी और अकाउंट्स विभाग की जांच में लगभग 2.35 करोड़ रुपए की अनियमितताएं सामने आई हैं।
विभिन्न खातों में संदिग्ध ट्रांसफर के प्रमाण
जांच रिपोर्ट के अनुसार बड़ी राशि अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई। इनमें याचिकाकर्ताओं और उनके परिजनों के खातों में भी रकम जमा होने के प्रमाण मिले हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि वास्तविक लाभार्थियों के बजाय अन्य खातों में राशि स्थानांतरित किए जाने के संकेत स्पष्ट हैं।
कोर्ट ने दतिया कलेक्टर और संबंधित जांच एजेंसी को मामले की जांच शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा कि याचिकाकर्ताओं को जांच और ट्रायल के दौरान अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

