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भारत के आसमान में जल्द दिखाई देगा प्रीडेटर ड्रोन, MQ-9B से भारत की ताकत बढ़ेगी

प्रीडेटर को नेक्स्ट जेनरेशन ड्रोन कहा जाता है। तय वक्त में जमीन और समंदर दोनों में मिलिट्री मिशन को अंजाम दे सकता है। खास बात यह है कि इजराइल और अमेरिका के अलावा किसी और के पास इतने बेहतरीन और एडवांस्ड ड्रोन नहीं हैं।नई दिल्ली. भारतीय सेना के बेड़े में जल्द MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन शामिल होने वाला है। 3 अरब डॉलर यानी 22,000 करोड़ रूपये से ज्यादा की लागत वाले 30 प्रीडेटर आर्म्ड ड्रोन को खरीदने के लिये भारत और अमेरिका के बीच बातचीत अंतिम दौर में है। हालांकि कुछ मुद्दों को सुलझाया जाना बाकी है। लम्बे समय तक हवा में रहने वाले इस ड्रोन से सुरक्षाबलों की ताकत में बढ़ोत्तरी होगी।
जनरल एटॉमिक्स ग्लोबल कॉर्पोरेशन के चीफ एक्जीक्यूटिव डॉ. विवेकलाल ने बताया कि दोनों सरकारों के बीच खरीदारी पर बातचीत अंतिम दौर में है। अमेरिकी कंपनी ‘‘जनरल एटॉमिक्स’’ ने यह ड्रोन बनाये हैं। इन 30 ड्रोन को चीन के साथ लगने वाली लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) और भारत की समुद्री सीमा में सर्विलांस और सिक्युरिटी बढ़ाने के लिये उपयोग किया जायेगा।
इसी ड्रोन से अल-जवाहिरी का खात्मा किया था
इन सभी ड्रोन को तीनों सेनाओं केलिये खरीदा जा रहा है। MQ-9B ड्रोन MQ-9 रीपर का दूसरा वर्जन है। पिछले माह इसका उपयोग काबुल में हेलफायर मिसाइल के एक मोडिफाइड वर्जन को दागने केलिये किया गया था। इसमें अल -कायदा नेता अयमान अल-जवाहिरी का खात्मा किया गया। ऐसा माना जाता है कि अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को तलाशने में इसका उपयोग किया था। हालांकि तब इसका पुराना वर्जन उपयोग किया गया था। भारत जिस वर्जन को खरीदने जा रहा है उसे दुनिया का मोस्ट एडवांस्ड ड्रोन कहा जाता है।
35 घंटे तक हवा में रह सकता है
यह ड्रोन लगभग 35 घंटे तक हवा में रह सकता है। यह फुली रिमोट कंट्रोल है। इसके लिये 2 लोगों की जरूरत पड़ती है। यह एक बार उड़ान भरने के बाद 199 किमी क्षेत्र की निगरानी कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक यह एक घंटे में 482 किमी तक उड़ सकता है। इसके पंखों की लम्बाई 65 फीट 7 इंच और इसकी ऊचाई 12 फीट 6 इंच रहती है।

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ग्वालियर में बिना डिग्री के डॉ. अंशुल मेहरा ने किया मासूम का इलाज, मौत , खुद को एमडी पीडियाट्रिशियन यूएसए की एमडी डिग्री होना बताते थे

ग्वालियर. परिवादी मनोज उपाध्याय एडवोकेट की 3 वर्षीय बेटी कुमारी गार्गी को दिनांक 25 जनवरी 2013 को मेहरा बाल चिकित्सालय अनुपम नगर में डॉक्टर डीडी शर्मा द्वारा रेफर किया गया था। गार्गी को निमोनिया की शिकायत थी। मेहरा बाल चिकित्सालय में डाक्टर आरके मेहरा अस्पताल के संचालक थे एवं डा अंशुल मेहरा बच्चों के डॉक्टर की हैसियत से कार्य करते थे। डॉ अंशुल मेहरा स्वयं को एमडी पीडियाट्रिशियन यूएसए की एमडी डिग्री होना बताते हुए ग्वालियर में मरीजों के साथ धोखाधड़ी करते थे। बेबी गार्गी का इलाज भी एमडी पीडियाट्रिशियन यूएसए बताते हुए किया था। बेबी गार्गी को निमोनिया होते हुए भी मेहरा हॉस्पिटल में 1 घंटे के भीतर 500 एमएल नॉरमल सलाइन की बोतल चढ़ा दी थी और स्वास्थ्य बिगड़ने पर भी आईवी फ्लूड दिया जाता रहा। इससे बेबी गार्गी के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ा। तब डॉ अंशुल मेहरा ने भर्ती के 3 घंटे बाद वेंटिलेटर की आवश्यकता बताते हुए मैस्कॉट हॉस्पिटल रेफर कर दिया था। मैस्कॉट हॉस्पिटल सिंधी कॉलोनी कंपू ग्वालियर के मालिक आलोक अग्रवाल थे एवं अस्पताल अधीक्षक के रूप में डॉक्टर सीमा शिवहरे व पीडियाट्रिशियन के रूप में डॉक्टर मनोज बंसल कार्य करते थे। मैस्कॉट हॉस्पिटल में बेबी गार्गी को पीआईसीयू में भर्ती किया गया था मैस्कॉट हॉस्पिटल के आईसीयू में बीएचएमएस के फेल छात्र ड्यूटी डॉक्टर के रूप में कार्य कर रहे थे । शैलेंद्र साहू एवं अवधेश दिवाकर को ड्यूटी डॉक्टर के रूप में सेवाएं ली गई थी। जबकि उक्त लोग होम्योपैथी कॉलेज में पढ़ रहे थे। शैलेंद्र साहू 3 वर्ष से लगातार होम्योपैथी में फेल हो रहा था और मैंस्कॉट हॉस्पिटल में आईसीयू में ड्यूटी डॉक्टर का कार्य कर रहा था। परिवादी द्वारा मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल में डॉ अंशुल मेहरा की एमडी पीडियाट्रिशियन की डिग्री होने की शिकायत की गई थी तो स्वयं डॉ अंशुल मेहरा ने मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल भोपाल के समक्ष क्षमा मांगी कि वह एमडी पीडियाट्रिशियन नहीं है और भविष्य में उक्त डिग्री नहीं लिखेगा। मेडिकल काउंसिल ने डॉ अंशुल मेहरा को चेतावनी दी थी कि यदि भविष्य में उनके द्वारा अवैध एमडी पीडियाट्रिशियन की डिग्री लिखी गई तो उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। परिवादी ने मेहरा बाल चिकित्सालय से ट्रीटमेंट पेपर की सीट प्राप्त की थी और पुलिस थाना विश्वविद्यालय में उपचार में लापरवाही की शिकायत की थी। डॉक्टर आरके मेहरा द्वारा बेबी गार्गी की दूसरी ट्रीटमेंट शीट बनाकर पुलिस को दे दी थी जिस पर पुलिस थाना विश्वविद्यालय द्वारा डॉ अंशुल मेहरा डॉ आरके गोयल के विरुद्ध धारा 420 ,465, 468 का अपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया था। अनुसंधान में धारा 304 एवं अन्य धाराओं का इजाफा किया गया।

सीएमएचओ ग्वालियर को परिवादी द्वारा शिकायत की गई थी तो सीएमएचओ कमेटी द्वारा भी अंशुल मेहरा के द्वारा बेबी गार्गी की मृत्यु के पश्चात ट्रीटमेंट पेपर बनाना पाए थे एवं निमोनिया के रोगी को आई वी फ्लूड दिए जाने की लापरवाही पाई थी। मैस्कॉट हॉस्पिटल के विरुद्ध जब परिवादी ने शिकायत की तो पाया गया कि मैस्कॉट हॉस्पिटल कि डॉ सीमा शिवहरे एवं अस्पताल के मालिक आलोक अग्रवाल द्वारा छात्रों से ड्यूटी डॉक्टर का कार्य लिया जाना पाया गया था एवं अपात्र चिकित्सकों से बेबी गार्गी का इलाज कराया जाना सही पाए जाने पर मैस्कॉट हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर सिंधी कॉलोनी कंपू ग्वालियर का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था।

 

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चीन को काबू करने के लिये 90 फायटर जेट वाले USS Ronald Reagan को अमेरिका ने उतारा

नई दिल्ली. अमेरिकी नौसेना का USS Ronald Reagan  दुनिया के दूसरे सबसे बड़े विमानवाहक पोत की श्रेणी में आता है। चीन को काबू में रखने के लिये अमेरिका ने इस परमाणु एयरक्राफ्ट करियर का ताइवान के पास तैनात कर दिया है। इस बैटलशिप में युद्ध से संबंधित सभी खासियत मौजूद है। यह निमित्ज क्लास (Nimitz Class) का एयर क्राफ्ट करियर है। जिसका नाम द्वितीय युद्ध के बाद Us पैसिफिक फ्लीट कमाण्डल फ्लीट एडमिरल चेस्टर डब्ल्यू निमित्ज के नाम पर दिया गया था। हालांकि रोनाल्ड रीगन नाम पूर्व अमेरिका राष्ट्रपति के नाम पर है।

USS Ronald Reagan Taiwan

निमित्ज क्लास में परमाणु ईंधन से संचालित होने वाले 10 एयरक्राफ्ट करियर्स हैं। जिनमें रोनाल्ड रीगन सबसे नये करियर्स में से एक हैं। इसे 12 जुलाई 2003 को अमेरिकी नौसेना को सौंपा गया था। तब से यह लगातार सक्रिय रूप से (US Seventh Fleet) अमेरिका के 7वें फ्लीट का प्रमुख जंगी जहाज है। इसकी डिस्प्लेसमेंट 1.01 लाख टन से अधिक और लम्बाई 1092फीट है। इस एयरक्राफ्ट करियर को 2 परमाणु रियेक्टर ताकत प्रदान करते हैं।

USS Ronald Reagan Taiwan

यूएसएस रोनाल्ड रीगन  (USS Ronald Reagan) में 4 स्टीम टरबाइन है। यह 56 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से पानी में चलता है। इसकी रेंज असीमित है। यह लगातार 20 से 25 वर्ष तक चल सकता है। इस एयरक्राफ्ट करियर पर 90 फिक्स्ड विंग्स विमान और हेलीकॉप्टर तैनात हो सकते हैं।

USS Ronald Reagan Taiwan

यूएसएस रोनाल्ड रीगन (USS Ronald Reagan)  पर तीन प्रकार के घातक हथियार तैनात है। पहला है इवॉल्व्ड सी स्पैरो मिसाइल (Evolved Sea Sparrow Missile)। दूसरा है रोलिंग एयरफ्रम मिसाइल (Rolling Airframe Missile और तीसरा है क्लोज -इन वेपंस (CIWS) सिस्टम। यह तीनों हथियार हमला करके दुश्मन के टारगेट को खत्म कर सकते हैं और साथ ही दुश्मन के विमानों, ड्रोन्स, रॉकेट्स और मिसाइलों से जहाज को बचा सकते हैं।

USS Ronald Reagan Taiwan

इस पर 2480 सैनिक तैनात हो सकते हैं। रोनाल्ड रीगन पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम लगा है। जिसे AN/SLQ-32A(V)4  काउंटरमेजर सूइट कहते हैं। इसके अलावा SLQ-25A Nixie टॉरपीडो काउंटरमेजर सिस्टम लगा है जो दुश्मन के टॉरपीडो का आने का समय, गति आदि पहले ही बता देता है। ताकि उससे बचा जा सके।

USS Ronald Reagan Taiwan

4 अगस्त 2022 को अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा है कि यूएसएस रोनाल्ड रीगन (USS Ronald Reagan)  को ताइवान के आसपास ही रहने का आदेश दिया गया है। क्योंकि चीन लगातार अपनी मिसाइलों से युद्धाभ्यास कर रहा है। इस एयरक्राफ्ट करियर पर अमेरिका के बेहतरीन फाइटर जेट्स तैनात हैं। इनमें F-35बी  लाइटनिंग-2 ज्वाइंट स्ट्राइक फाइटर जेट्स भी शामिल है।

USS Ronald Reagan Taiwan

इसके अलावा यूएसएस रोनाल्ड रीगन (USS Ronald Reagan) पर F/A-18E/F Super Hornet  फायटर जेट्स E-2C Hawkeye  जासूसी विमान SH-60F Seahawk  हेलिकॉप्टर्स और C-2A Greyhound निगरानी विमान भी तैनात रहते हैं। ताइवान के पास तैनाती के समय इस करियर पर इन विमानों की संख्या का खुलासा अमेरिका ने नहीं किया हे।

USS Ronald Reagan Taiwan

यूएसएस रोनाल्ड रीगन (USS Ronald Reagan) पर F-35 Lightning II  फाइटर जेट तैनात है। इसे एक ही पायलट उड़ाता है। लम्बाई 51.4 फीट, विंगस्पैन 35 फीट और ऊंचाई 14.4 फीट है। अधिकतम गति 1975 किमी प्रतिघंटा है। कॉम्बैट रेंज 1239 किमी है। अधिकतम 50 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। इसमें 4 बैरल वाली 25 मिमी की रोटरी कैनन लगी है। जो एक मिनट में 180 गोलियां दागती है। इसमें 4 अंदरूनी और 6 बाहरी हार्ड प्वाइंट्स है। हवा से हवा, हवा से सतह, हवा से शिप और एंटी -शिप मिसाइलें तैनात की जा सकती है। इसके अलावा 4 तरीके के बम लगाये जा सकते हैं। यानी चीन को करारा जवाब देने के लिये यह फाइटर जेट काफी है।

USS Ronald Reagan Taiwan

दूसरा खतरनाक फाइटर जेट है एफ-18 सुपर हॉर्नेट (F-18 Super Hornet)। जिसकी गति मैक 1.8 है। यानी 2222.4 किमी प्रतिघंटा। सुपर हॉर्नेट की रेंज 3300 किमी है। एफ-18 सुपर हॉर्नेट 50 हजार फीट पर उड़ सकता है। सुपर हॉर्नेट जहां 228 मीटर प्रतिसेकेण्ड की गति से ऊपर जाता है। सुपर हॉर्नेट में AIM-120 AMRAAM  मिसाइल लगती है। हॉर्नेट में 20 मिमी कैलिबर की M61A1 वल्कैन तोप लगी है।

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चीन को भारत की दो टूक-लद्दाख सीमा से दूर रहें चीनी फाइटर जेट

नई दिल्ली. भारत ने चीन के साथ सैन्य स्तर की बैठक बुलाई थी। इसमें भारत ने पूर्वी लद्दाख में चीन की उकसावे वाली गतिविधियों को लेकर विरोध दर्ज कराया। केन्द्र सरकार के सूत्रों ने आज तक को बताया कि यह विशेष सैन्य बैठक मेजर जनरल के नेतृत्व में हुई। इस बीच एयरफोर्स के एयर कोमोडोर भी मौजूद रहे।
भारत ने पूर्वी लद्दाख में सीमा के पास लड़ाकू विमान उड़ाने का लेकर चीन को सख्त चेतावनी दी है। भारत ने चीन ने अपने लड़ाकू विमानों को लद्दाख सीमा से दूर रखने के लिये कहा है। दरअसल, पिछले दिनों चीन के लड़ाकू विमान भारत की सीमा के काफी पाास आ गये थे। भारत ने चीन का यह चेतावनी ऐसे समय पर दी है। जब उसका ताइवान के साथ विवाद चल रहा है। अमेरिकी स्पीकर नैंसी पेलोसी के ताइवान दौरे के बाद से चीन भड़का हुआ है। इसके विरोध में चीन ताइवान की सीमा से लगे इलाकों में सैन्याभ्यास भी कर रहा है।
भारत और चीन केबीच पूर्वी लद्दाख में चल रहे सीमा विवाद के बीच यह पहला मामला था। जब भारतीय वायुसेना के किसी अधिकारी ने सैन्य स्तर की बातचीत में भाग लिया हो। यह बैठक मंगलवार को चुंशूल मोल्डो में हुई है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में भारत ने चीनी पक्ष को साफ कर दिया कि विमान उड़ते समय अपनी सीमा में रहें और साथ ही एलएसी और 10 किमी सीबीएम लाइन का पालन करें।
एयरचीफ मार्शल वीआर चौधरी ने बताया कि भारत एलएसी के पार की हवाई गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है। उन्होंने कहा था कि जैसे ही हम एलएसी पर किसी भी चीनी गतिविधि को देखते हैं। हम भी हमने लड़ाकू विमान तैनात कर दते हैं। उन्होंने बताया था कि भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर रडार लगा रही है, ताकि हम हवा में होने वाली किसी भी गतिविधि पर नजर रख सके।

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जंग के द्वार पर खड़ा है एशिया, ताइवान के सामने शक्तिप्रदर्शन कर रहा है चीन

चीन का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास (Photo: Reuters)देश-दुनिया. China-Taiwan Tension एशिया इस समय जंग का मैदान बना हुआ है। जहां एक ओर रूस और यूक्रेन के बीच भीषण युद्ध चल रहा है। वहीं दूसरी ओर चीन और ताइवान के बीच भी विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है। दोनों ही देशों के बीच अभी तनाव का माहौल बना हुआ है। अब अजरबैजान औरे अर्मीनिया के बीच युद्ध की शुरूआत होते दिखाई दे रही है। अज़रबैजान ने नागार्नो स-काराबााख के इलाके में हमला किया है। हमले में 3 सैनिकों की मौत हो गयी है। अब देखना यह है एशिया में भविष्य में और क्या होता है।

ताइवान को घेरने का प्रयास (Photo: Reuters)

सोच समझकर जंग के मैदान में कूदेगा चीन

जानकारों की मानें तो चीन बहुत सोच समझकर जंग के मैदान में कूदेगा । क्योंकि, ये जंग सिर्फ ताइवान के लिए ही नहीं बल्कि उसके लिए भी घातक साबित होगी । ऐसा इसलिए क्योंकि, चीन की ताकत उसका पैसा है । वो पैसा जो वो अमेरिका समेत यूरोपीय देशों से इंपोर्ट-एक्सपोर्ट के जरिए कमाता है।  ऐसे में अगर चीन ने ताइवान पर हमला बोला तो सुपरपावर अमेरिका उसकी इस कमजोर नस को दबा सकता है।

चीन के 27 लड़ाकू विमान ताइवान की हवाई सीमा में घुसे

नैंसी पेलोसी के ताइवान से रवाना होने के पहले ही चीन की नौसेना और वायुसेना ने दक्षिण चीन सागर में 6 जगह युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है।  चीन की नौसेना ताइवान के उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम में जिस जगह लाइव फायर ड्रिल कर रही है।  वहां से ताइवान की दूसरी 15 मील से भी कम बताई जा रही है।  पेलोसी के दौरे से बौखलाए चीन ने ताइवान में कई जगहों पर अपने फाइटर जेट और युद्धपोतों की भी तैनाती कर दी है।  चीन के 27 लड़ाकू विमान ताइवान की हवाई सीमा में घुस चुके है।  चीन का ये युद्धाभ्यास 1996 के ताइवान संकट से भी ज्यादा बड़ा है। चीन की सरकारी मीडिया ने तो यहां तक धमकी दे दी है कि 7 अगस्त तक चलने वाला युद्धाभ्यास आगे भी बढ़ सकता है और ये भी हो सकता है कि चीन की सेना ताइवान के सैन्य ठिकानों पर हमला भी कर दे ।

कई देश कर चुके चीन की आलोचना

चीन की इस हरकत पर अमेरिका व अन्य पश्चिमी देशों ने कड़ी आपत्ति व्यक्त की है।  7 विकसित देशों के समूह G7 के विदेश मंत्रियों ने एक साझा बयान जारी कर चीन के कदम की निंदा की है। वहीं आसियान देशों के विदेश मंत्रियों ने भी चीन के युद्धाभ्यास पर चिंता व्यक्त की है। चीन ने अमेरिका के खिलाफ आर्थिक मोर्चे पर भी कठोर कदम उठाने की चेतावनी दी है। इन सब घटनाक्रमों से इस बात का अंदेशा हो रहा है कि कहीं फिर से ट्रंप के दौर वाला ट्रेड वार लौट न जाए ।  ट्रंप के कार्यकाल के दौरान चीन और अमेरिका के बीच चले ट्रेड वार से दुनिया की दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान उठाना पड़ा था । उस दौरान चीन के ऊपर लगी कई पाबंदियां अभी तक हटी भी नहीं हैं और उससे पहले ही नया संकट सामने आ गया है।

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भारत के अगले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस यूयू ललित होंगे

नई दिल्ली. देश के अगले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस यूयू ललित  (Justice UU Lalit)  हो सकते हैं। भारत के वर्तमान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (Cheif Justice of India)   एनवी रमणा (CJI NV Ramana) ने अगले सीजेआई के लिये जस्टिस उदय उमेश ललित के नाम की सिफारिश की है। उन्होंने सीलबंद लिफाफा कानून और न्याय मंत्री को सौंप दिया है। आपको बता दें कि पारंपरिक रूप से सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश अपनी वरिष्ठता के आधार पर सीजेआई के रूप में कार्यभार संभालते है। भारत के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमणा (CJI)  ने अगले सीजेआई के लिये जस्टिस उदय उमेश ललित के नाम की सिफारिश की है।

इसी महीने वर्तमान सीजेआई का रिटायरमेंट

आपको बताते चलें कि भारत के मौजूदा चीफ जस्टिस एनवी रमणा आगामी 16 अगस्त को पद से रिटायर हो रहे है।  ऐसे में अभी तक चली आ रही परंपरा के मुताबिक उन्होंने जस्टिस यूयू ललित (Justice UU Lalit) के नाम की सिफारिश सरकार को भेजी है।  CJI रमणा ने सिफारिशी पत्र कानून और न्याय मंत्री को सौंप दिया है।

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Nancy Pelosi in Taiwan-नैंसी पेलोसी ताइवान पहुंची

यूएस स्पीकर नैंसी पेलोसी ताइवान पहुंचीं (फाइल फोटो)

ताइवान. चीन की धमकियों के बीच अमेरिकी सदन की स्पीकर नैंसी पेलोसी ताइवान पहुंच गयी है। उनका प्लेन ताइपे के एयरपोर्ट पर उतरते ही चीन और बौखला गया। चीन के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा गया है कि अमेरिका खतरनाक जुआ ख्ेाल रहा है। और अब जो गंभीर परिणाम होंगे और उसकी जिम्मेदारी अमेरिका को लेनी होगी। चीन लगातार नैंसी पेलोसी के ताइवान दौरे का विरोध कर रहा था। चीन का कहना है कि अमेरिका अब तक ‘वन चाइना’ के सिद्धांत को फॉलो करता रहा है। ऐसे में अब ताइवान के अलगाववाद का समर्थन करना अमेरिका का वादा तोड़ने जैसा है।

चीन और ताइवान की जंग किस बात पर है?

ताइवान और चीन के बीच जंग काफी पुरानी है. 1949 में कम्यूनिस्ट पार्टी ने सिविल वार जीती थी।  तब से दोनों हिस्से अपने आप को एक देश तो मानते हैं लेकिन इस पर विवाद है कि राष्ट्रीय नेतृत्व कौन सी सरकार करेगी।  चीन ताइवान को अपना प्रांत मानता है, जबकि ताइवान खुद को आजाद देश मानता है।  दोनों के बीच अनबन की शुरुआत दूसरे विश्व युद्ध के बाद से हुई।  उस समय चीन के मेनलैंड में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और कुओमितांग के बीच जंग चल रही थी।

1940 में माओ त्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्टों ने कुओमितांग पार्टी को हरा दिया। हार के बाद कुओमितांग के लोग ताइवान आ गए।  उसी साल चीन का नाम ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ और ताइवान का ‘रिपब्लिक ऑफ चाइना’ पड़ा।  चीन ताइवान को अपना प्रांत मानता है और उसका मानना है कि एक दिन ताइवान उसका हिस्सा बन जाएगा।  वहीं, ताइवान खुद को आजाद देश बताता है।  उसका अपना संविधान है और वहां चुनी हुई सरकार है।  ताइवान चीन के दक्षिण पूर्व तट से करीब 100 मील दूर एक आइसलैंड है। चीन और ताइवान, दोनों ही एक-दूसरे को मान्यता नहीं देते।  अभी दुनिया के केवल 13 देश ही ताइवान को एक अलग संप्रभु और आजाद देश मानते हैं।

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ड्रोन हमले में मारा अल कायदा का चीफ जवाहिरी

अफगानिस्तान  (Afghanistan)  . काबुल (Kabul) के आतंकी संगठन अल कायदा (Al Qaeda)  के चीफ अयमान अल जवाहिरी का जान से मारने का दावा अमेरिका ने किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन  (Joe Biden) ने स्वयं इस बात का ऐलान किया है कि 9/11 हमले की ओसामा बिल लादेन (Osama Bin Laden)  के साथ मिलकर साजिश करने वाले अयमान अल जवाहिरी को एयर स्ट्राइक  (Air Strike) में मार गिराया है।


गौरतलब है कि अयमान अल जवाहिरी की मौत के बाद अल कायदा चीफ का पद खाली हो गया है। इस दौरान सवाल यह है कि अल कायदा की कमान अब कौन संभालेगा? ऐसे में आतंकी सैफ अल आदिल (Saif al-Adel) के नाम की चर्चा अल कायदा के अगले चीफ के तौर पर तेज हो गयी है।

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भारत को मिला पहला मेडल, वेटलिफ्टिंग में संकेत महादेव ने जीता सिल्वर

बर्मिंघम. इंग्लैंड के बर्मिंघम में खेले जा रहे 22वें कॉमनवेल्थ गेम्स में 30 जुलाई दूसरे दिन भारत का खाता सिल्वर मेडल से खुल गया है। आज भारत को पहला मेडल स्टार वेटलिफ्टर संकेत महादेव सरगर ने दिलाया है।
उन्होंने मेन्स के 55 किग्रा इवेंट के फायनल में यह उपलब्धि हासिक की है। संकेत सरगर ने 2 राउण्ड के 6 अटेम्प में अपनी पूरी ताकत झोंक दी और कुल 228 किग्रा वनज उठाते हुए सिल्वर अपने नाम कर लिया है।
महाराष्ट्र के सांगली के रहने वाले संकेत ने इस बार न सिर्फ कॉमनवेल्थ गेम्स के फायनल में जगह बनाई। बल्कि शानदार प्रदर्शन करते हुए लोगों को अपना मुरीद कर लिया है। उन्होंने पहले राउण्ड यानी स्नैच में बेस्ट 113 किग्रा वजन उठाया। इसके बाद दूसरे राउण्ड यानी क्लीन एण्ड जर्क में 135 किग्रा भार उठाकर मेडल अपने नाम किया।

आखिरी 2 अटेंप में चोटिल हुए संकेत, गोल्ड से चूके

दूसरे राउंड के आखिर दो अटेंप में संकेत चोटिल भी हुए थे. दूसरे अटेंप में संकेत ने 139 किग्रा भार उठाना चाहा, लेकिन उठा नहीं सके और चोटिल हो गए । मेडिकल टीम ने संकेत को देखा और तुरंत इलाज किया । यहां संकेत ने कहा कि वह ठीक हैं और तीसरे अटेंप के लिए तैयार हो गए ।

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