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BSF से बर्खास्त जवान निकला चेन लुटेरा, पुलिस ने 3 वर्ष पुराना लूटकांड का पर्दाफाश

ग्वालियर. डबरा में 3 वर्ष पहले हुई महिला से चेन लूट की घटना का पुलिस अंततः खुलासा कर ही दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि लूट का अंजाम देने वाला एक आरोपी सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) से बर्खास्त जवान निकाला है। जबकि उसका साथी अब प्रॉपर्टी डीलर बन चुका है।
इस केस को सुलझाने में सीसीटीवी फुटेज में बाइक पर टंगी मामला पुलिस के लिये सबसे बड़ा सुराग साबित हुई है। इसी सुराग से पुलिस ने केस की कडि़यां जोड़ते हुए 3 साल के बाद दोनों लुटेरों तक पहुंच गयी है।
यह था घटनाक्रम
11 जून 2022 की शाम को डबरा देहात के बुजुर्ग रोड निवासी संतोष भार्गव अपनी पत्नी, बहू और साली के साथ मंदिर दर्शन के लिए जा रहे थे। तभी तहसील रोड पर एक दुकान के सामने पीछे से आए दो युवक पल्सर बाइक पर सवार होकर पहुंचे और उनकी साली ज्योति शर्मा के गले से सोने का मंगलसूत्र झपटकर फरार हो गए। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरे खंगाले, जिनमें दो युवक बाइक पर दिखे। हालांकि, आरोपियों की पहचान नहीं हो पाई और केस ठंडे बस्ते में चला गया।
सीसीटीवी फुटेज में आई माला बनी सबूत
तीन वर्षो के बाद क्राइम ब्रांच के आरक्षक राजीव शुक्ला एक अन्य मामले की जांच के सिलसिले में भिंड गये थे। वहां फोटो दिखाने के दौरान कुछ लोगों ने एक संदिग्ध की पहचान कर ली। बताया गया कि यह वही शख्स है जो उनके साथ गोहद जेल में बंद था। राजीव ने तत्काल पुराने सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दे रही बाइक पर टंगी माला भी वहीं थी। जो हाल में देखी गयी बाइक पर मौजूद थी।
दोनों आरोपी मुरैना के रहने वाले
पुलिस ने सबसे पहले मुरैना रजिस्ट्री कार्यालय से आरोपी राजेश कुशवाहा को पकड़ा। उससे पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस वारदात में उसका साथी प्रताप कुशवाहा भी शामिल था, जो BSF से पिस्टल चोरी के केस में बर्खास्त हो चुका है। प्रताप को सबलगढ़ से गिरफ्तार किया गया। वह 10 दिन पहले ही जेल से बाहर आया था। पूछताछ में दोनों ने लूट की बात कबूल की है। लूट में उपयोग की गई पल्सर बाइक भी पुलिस ने बरामद कर ली है। अब उनसे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि लूटा गया मंगलसूत्र कहां बेचा गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन दोनों से पूछताछ में ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में हुई अन्य लूटपाट की वारदातों के भी खुलासे हो सकते हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि लूट का कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं है।

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