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AMU के अल्पसंख्यक दर्ज का क्या होगा, 3 जजों की बैंच तय करेगी

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में AMU 1920 से संचालित है। सर सैयद अहमद खान ने ब्रिटिश सरकार की मदद से इसे स्थापित किया था। - Dainik Bhaskar

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के अल्पसंख्यक दर्जे पर अपना फैसला सुनाते हुए। एएमयू को अल्पसंख्यक दर्जे की हकदार माना है। कोर्ट ने इस मामले में अपना ही 1967 का फैसला बदल दिया है। जिसमें कहा गया था कि एएमयू अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान का दर्जे का दावा नहीं कर सकती है। अन्य समुदायों को भी इस संस्थान में बराबरी का अधिकार है।
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने दिया है। इस बेंच में 7 जज शामिल थे। जिसमें 4 ने पक्ष में और 3 ने विपक्ष में फैसला सुनाया। इस फैसले को देते हुए मामले को जजों की रेगुलर बेंच को भेज दिया गया है। इस बेंच को यह जांच करनी है कि एएमयू की स्थापना अल्पसंख्यकों ने की थी क्या?
सुप्रीम कोर्ट का है क्या फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि 3 जजों की एक नयी बेंच आज के जजमेंट के आधार पर इसबात पर विचार करेगी कि क्या एएमयू को अल्पसंख्यक दर्जा दिया जाना चाहिये या नहीं। अदालत ने आज अल्पसंख्यक दर्जे के लिये मापदंड तय कर दिये है। याचिकाकर्ता के वकील शादान फरासत ने कहा है कि आज 2 मापदंड तय कर दिये गये है। जिनके आधार पर दयह तय किया जायेगा कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान है या नहीं जो मापदंड तय किये गये है। उन्हें करीब-करीब एएमयू पूरा करता है लेकिन इसका फैसला एक छोटी बैंच करेगी। जब भी मामला सूचीबद्ध होगा।

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