हाईकोर्ट में हनीट्रैप मामले सुनवाई हुई, याचिकाकर्ता बोले एसआईटी का झुकाव अधिकारियों की तरफ, केस सीबीआई को सौंपें
भोपाल. हनी ट्रैप मामले की जांच सीबीआई को सौंपने और बारबार एसआईटी चीफ बदले जाने को लेकर दायर याचिकाओं पर इंदौर की हाईकोर्ट बैंच ने सुनवाई पूरी की और फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिकाकर्ताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तर्क रखे। जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस शैलेंद्र शुक्ला की डिवीजन बेंच ने सभी को सुनने के बाद कहा कि वे कुछ और दस्तावेज, तर्क देना चाहते है तो 8 दिन के भीतर कोर्ट में जमा करा सकते है। एसआईटी की ओर से महाधिवक्ता पुरूषेंद्र कौरव ने पैरवी की। हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर एसआईटी चीफ से सीलबंद रिपोर्ट व अधिकारियों के नाम पर सवाल-जवाब किए थे।
शिकायतकर्ता हरभजन सिंह को भी आरोपी बनाए
याचिकाकर्ता दिग्विजय भंडारी की ओर से सीनियर एडवोकेट मनोहर दलाल ने कहा कि शिकायतकर्ता हरभजन सिंह को भी आरोपी बनाया जाना चाहिए। एसआईटी में राज्य सरकार के ही पुलिस अधिकार है। ऐसे में उनका झुकाव अधिकारियों की ओर ही रहेगा। सीबीआई ही तटस्थ एजेंसी के रूप में सही जांच कर सकती है।
सरकार में ही लोग इस केस को दबाना चाहते है
याचिकाकर्ता शेखर के अधिवक्ता धर्मेंद्र चेलावत ने कहा कि सीबीआई ने 16 मार्च को ही इस केस को हाथ में लेने की मंशा जाहिर कर दी थी। सीबीआई जवाब में कह चुकी है कि 10 दिन में तीन बार एसआईटी चीफ बदलना यह बताता है कि सरकार में ही लोग इस केस को दबाना चाहते है। हर बार जब हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई, फटकार लगाई तो एसआईटी ने सीलबंद जांच रिपोर्ट पेश की। सीबीआई इच्छुक है तो केस उसे सौंप देना चाहिए। एसआईटी पर अप्रत्यक्ष रूप से सरकार का नियंत्रण रहता है।
एसआईटी बहुत लचर जांच कर रही
याचिकाकर्ता शिरीष मिश्रा की ओर से अधिवक्ता निधि बोहरा पूर्व में ही सीबीआई जांच के लिए अंतरिम आवेदन लगा चुकी थी। आवेदन में लिखा है कि एसआईटी बहुत ही लचर तरीके से जांच कर रही है। कुछ दस्तावेज जांच के लिए भेजे तो कुछ छोड़ दिए गए। ऐसे में सही जांच एसआईटी से संभव नहीं है।

