लोकपाल नियुक्त नहीं करने पर MP की 16 यूनिवर्सिटीज को यूजीसी ने किया डिफाल्टर घोषित
ग्वालियर. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी ने लोकपाल नियुक्त नहीं करने पर मध्य प्रदेश के 16 विश्वविद्यालयों को डिफाल्टर घोषित किया है। यह कार्रवाई 7 बडे सरकारी विश्वविद्यालयों और 9 निजी विश्वविद्यालययों पर हुई है। इनमें ग्वालियर के राजा मान सिंह संगीत एवं कला विश्वविद्यालय और राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, भोपाल के राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, जबलपुर की मध्य प्रदेश मेडिकल यूनिवर्सिटी, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय और नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय है। यह संयोग है कि ग्वालियर के राजा मानसिंह संगीत विश्वविद्यालय के लिए विश्व संगीत दिवस के मौके पर ही डिफाल्टर घोषित किया गया है। हालांकि संगीत विश्वविद्यालय के कुलपति का कहना है कि हमारे यहां लोकपाल नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। वहीं ग्वालियर के कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति का कहना है कि हमने लोकपाल की नियुक्ति कर दी है।
इन प्राइवेट यूनिवर्सिटीज पर हुई कार्रवाई
यूजीसी ने मध्य प्रदेश के सात सरकारी विश्वविद्यालयों के साथ ही नौ प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को भी डिफॉल्टर घोषित किया है। इनमें आर्यावर्त यूनिवर्सिटी सीहोर, एलएनसीटी विद्यापीठ यूनिवर्सिटी इंदौर, मध्यांचल प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भोपाल, ओरिएंटल यूनिवर्सिटी इंदौर, श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय इंदौर, स्वामी विवेकानंद यूनिवर्सिटी सागर, ज्ञानोदय यूनिवर्सिटी नीमच, जेएनसीटी प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भोपाल और अमलतास यूनिवर्सिटी देवास हैं।
लोकपाल करते हैं विद्यार्थियों की समस्याओं का निवारण
देश के सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की शिकायतों का निराकरण करने के लिए लोकपाल की नियुक्ति करना थी। यूजीसी ने विद्यार्थियों की शिकायतों के लिए शिकायत निवारण विनियम-2023 को अधिसूचित कर दिया था। इसके तहत प्रवेश संबंधी गड़बड़ी, फीस, सर्टिफिकेट वापस न करना, उत्पीड़न, परीक्षा संचालन में अनियमितता, छात्रवृति, दाखिले को लेकर गड़बड़ी, आरक्षण नियमों का पालन न करना जैसी अन्य शिकायतों पर अब 15 कार्य दिन में समिति को रिपोर्ट करने और निपटारा करने का दायित्व लोकपाल का होता है।

