एनडीपीएस संबंधी अपराधों में विवेचना के लिए एक दिवसीय कार्यषाला
ग्वालियर। ट्रिपल आईटीएम कॉलेज ग्वालियर के ऑडिटोरियम में आज ग्वालियर जोन के पुलिस अधिकारियों के लिये ‘‘एनडीपीएस एक्ट के अपराधों में गुणात्मक अनुसंधान’’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यषाला का शुभारंभ मुख्य अथिति न्यायमूर्ति दीपक अग्रवाल, द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस कार्यशाला में विषिष्ठ अतिथि के रूप में सेवानिवृत न्यायमूर्ति एमके मुद्गल, एडीजीपी डी. श्रीनिवास वर्मा एवं अपर सत्र न्यायाधीष निवेष कुमार जायसवाल भी उपस्थित रहे।
कार्यशाला में उपस्थित अतिथियों के स्वागत उपरान्त एसपी द्वारा एनडीपीएस एक्ट की विवेचना संबंधी आयोजित कार्यषाला की रूपरेखा से सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों को अवगत कराया। इस अवसर पर उन्होने उपस्थित प्रतिभागियों से कहा कि यह एक गंभीर विषय है और मादक पदार्थ समाज व युवा पीढ़ी के लिए घातक है, क्योंकि बहुत से अपराध मादक पदार्थ के सेवन के उपरान्त ही घटित किए जा रहे हैं। उक्त कार्यषाला में मंच संचालन सीएसपी महाराजपुरा रवि भदौरिया द्वारा किया गया।
मुख्य अथिति न्यायमूर्ति दीपक अग्रवाल ने उपस्थित प्रतिभगियों को संबोधित करते हुए कहा कि मादक पदार्थ के सेवन से युवा पीढ़ी अपना जीवन बर्बाद कर रही है। पुलिस अधिकारियों को एनडीपीएस संबंधी प्रकरणों की विवेचना काफी गंभीरता से करनी चाहिए क्योंकि कभी-कभी विवेचक द्वारा की गई एक छोटी सी चूक के कारण आरोपी न्यायालय से बरी हो जाता है। इसका प्रमुख कारण अनुसंधान के दौरान विवेचना का कमजोर होना होता है। इसलिए प्रत्येक पुलिस अधिकारी को एनडीपीएस प्रकरण की विवेचना करते समय उसका स्तर उच्च रखना चाहिए साथ ही सुपरविजन अधिकारियों को भी यह ध्यान रखना चाहिये कि विवेचना अधिकारी द्वारा प्रकरण में किसी प्रकार की कोई कमी तो नही छोड़ी है
सेवानिवृत न्यायमूर्ति एमके मुद्गल द्वारा कार्यषाला में उपस्थित प्रतिभागियों को एनडीपीएस संबंधी प्रावधानों एवं की जाने वाली संपूर्ण कार्यवाहियों से अवगत कराया गया। इस अवसर पर उन्होने कहा कि विवेचक द्वारा विवेचना के दौरान की गई छोटी-छोटी त्रुटियां की जाती है जबकि एनडीपीएस एक्ट के प्रकरणों में गलतियों की कोई गुंजाइष होनी ही नही चाहिये।
प्रशिक्षण कार्यशाला में एडीजीपी डी. श्रीनिवास द्वारा प्रशिक्षण कार्यशाला में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि विवेचना पुलिस प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग है इसलिए विवेचक को एनडीपीएस जैसे गंभीर अपराधों का अनुसंधान करते समय विवेचना का स्तर उच्च कोटी का रखना चाहिए साथ ही नियम प्रक्रिया का पूर्ण रूप से पालन किया जाना चाहिए जिससे आरोपी को न्यायालय से दण्ड दिलवाया जा सके।
इसी क्रम में अपर सत्र न्यायाधीष ग्वालियर निवेष कुमार जायसवाल द्वारा कार्यषाला में उपस्थित प्रतिभागियों को एनडीपीएस एक्ट के नवीन प्रावधानों से अवगत कराया गया साथ ही विवेचक द्वारा की जाने वाली छोटी-छोटी त्रुटियां व उनके सुधार के तरीको से सभी को अवगत कराया। उन्होने कार्यषाला में उपस्थित प्रतिभागियों से कहा कि एनडीपीएस के प्रकरणों की विवेचना में प्रक्रियात्मक त्रुटि नही होनी चाहिए आपके द्वारा की गई विवेचना में यह दिखना चाहिए कि विवेचक का आचरण संपूर्ण प्रक्रिया में संदेह से परे रहा है।
कार्यषाला के द्वितीय सत्र में एसपी अजाक ग्वालियर रेंज पंकज पाण्डेय द्वारा एनडीपीएस एक्ट संबंधी अपराधों के अनुसंधान में की जाने वाली कार्यवाहियों तथा उसमें बरती जाने वाली सावधानियों से उपस्थित प्रतिभागियों को अवगत कराया गया। व्याख्यान के प्रारंभ में उनके द्वारा वीडियों क्लिप के माध्यम से नषे के दुष्परिणामों से अवगत कराया गया।

