MP में पुरानी पेंशन पर भाजपा सरकार का इंकार करने पर कांग्रेस ने विधानसभा से किया वॉकआउट
भोपाल. मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में आज 8वें दिन पुरानी पेंशन पर हंगामा हो गया। प्रश्नकाल के बीच पूर्वमंत्री सज्जन वर्मा सवाल पर वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि पुरानी पेंशन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं हैं। मंत्री के जवाब पर कांग्रेस विधायक सदन से वॉकआउट कर गये। पुरानी पेंशन पर सवाल और हंगामे के बीच विधानसभा की बिजली गुल हो गयी। 5 मिनट के बाद बिजली आयी।
कमलनाथ ने कहा है कि हर सरकार कर्मचारियों से चलती है और अगर कर्मचारियों के साथ ही अन्याय हो, तो कैसे सरकार चलेगी। हमारे साथी सज्जन वर्मा ने सीधा सा प्रश्न पूछा कि क्या सरकार पुरानी पेंशन लागू करेगी? वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने जवाब में कहा है कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। यह घोर अन्याय है। सरकार ने सदन में स्पष्ट कर दिया है कि पुरानी पेंशन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। कांग्रेस की सरकार बनेगी तो हम यह निर्णय करेंगे। सज्जन वर्मा ने शून्यकाल में कहा, भोपाल में गैस पीडि़तों की बड़ी आबादी है। इनके मुआवजे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को फटकार लगाई है और यह कहा है कि 8 हजार करोड़ का मुआवजा केन्द्र सरकार अपनी ओर से दे।
आज विधानसभा में अनुपूरक बजट पेश किया गया। इस पर 16 मार्च को चर्चा की जायेगी। वित्तमंत्री की मांग पर स्पीकर गिरीश गौतम ने 1.30 घंटे का समय तय किया है।
विकास यात्रा के लिए पैसे हैं … पुरानी पेंशन के लिए नहीं
सज्जन सिंह वर्मा ने कहा- ये निर्दयी सरकार पुरानी पेंशन लागू करने में कोई निर्णय नहीं ले रही है।
इनके मंत्री हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों से ज्ञापन लेकर आते हैं और उसे कूड़े के डब्बे में डाल देते हैं।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने कहा- सप्लीमेंट्री बजट में पुरानी पेंशन देने का कोई प्रस्ताव लाएंगे?
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा- सरकार के पास पुरानी पेंशन को लेकर कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा- आपके पास चीतों के लिए 3000 करोड़ हैं। विकास यात्रा के लिए पैसे हैं, पुरानी पेंशन के लिए नहीं हैं?
नेता प्रतिपक्ष ने कहा- सरकार कर्मचारी विरोधी है। इसलिए कांग्रेस बहिर्गमन (वॉकआउट) कर रही है।
संजय यादव बोलने खड़े हुए, तो स्पीकर ने पूछा आप बहिर्गमन में शामिल हो या नहीं?
गोविंद सिंह ने पूछा- क्या सप्लीमेंट्री बजट में आप इसे लाएंगे? वित्त मंत्री ने साफ मना कर दिया।
सीएम के बंगले से सटा बंगला बिना इजाजत तोड़ दिया…
जबलपुर से कांग्रेस विधायक विनय सक्सेना ने नीलबड़ में पार्षद द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जे का मामला उठाया।
कहा- नीलबड़ में जिस दिन मुख्यमंत्री पट्टे दे रहे थे, उसी नीलबड़ में एक पार्षद का जमीनों पर कब्जा है।
मेरे पास कागज हैं, यदि कहेंगे तो मैं पटल पर रख दूंगा। मुख्यमंत्री जी उस माफिया पर बुलडोजर कब चलाएंगे?
आगे कहा- आयुष्मान योजना में जबलपुर संभाग के 139 अस्पतालों में गड़बड़ियां मिली हैं।
सक्सेना ने भोपाल में सीएम शिवराज के बंगले से सटे एक बंगले को बिना पीडब्लूडी मंत्री की मंजूरी के तोड़ने का मामला उठाया।
उन्होंने कहा- एक बंगले को मंत्री की अनुमति के बगैर डिस्मेंटल कर 2 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। अगर मंत्री के पास फाइल गई हो, तो बता दें।
सभापति ने टोका तो सक्सेना बोले- जब बडे़ लोगों की बात आती है, तो आप क्यों रोकते हैं?
विधानसभा की कार्यवाही के बीच संजय पाठक के साथ निजी विमान से विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम, अरविंद भदौरिया, राजेंद्र शुक्ला, रमेश मेंदोला ने उज्जैन पहुंचकर मंत्री मोहन यादव की मां के निधन पर श्रद्धांजलि व्यक्त की।
विधानसभा की कार्यवाही के बीच संजय पाठक के साथ निजी विमान से विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम, अरविंद भदौरिया, राजेंद्र शुक्ला, रमेश मेंदोला ने उज्जैन पहुंचकर मंत्री मोहन यादव की मां के निधन पर श्रद्धांजलि व्यक्त की।
अनुकंपा नियुक्ति पर मंत्री बोले- बिना परीक्षा नहीं दे सकते
शमशाबाद बीजेपी विधायक राजश्री रूद्र प्रताप सिंह ने कहा- मेरी विधानसभा क्षेत्र में लंबित अनुकंपा नियुक्तियां सरकार कब करेगी?
स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा- संविदा शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने पर ही अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी।
यशपाल सिंह सिसोदिया ने कहा- कई युवा अनुकंपा नियुक्ति के इंतजार में ओवरएज हो रहे हैं। समय पर पात्रता परीक्षा क्यों नहीं हो पा रही?
मंत्री ने आश्वासन देते हुए कहा- हम पात्रता परीक्षा एक बार लेंगे। बार-बार पात्रता परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं है।
शिक्षा के मामले में योग्यता में समझौता नहीं करेंगे, इसलिए शिक्षक पात्रता परीक्षा देकर ही नियुक्ति की जा रही है।
बीजेपी विधायक मंत्री से बोले- आश्वासन दें कि व्यापारी की बदनामी न हो
जौरा से बीजेपी विधायक सूबेदार सिंह रजौधा ने पूछा- भीड़ और मीडिया को जमा कर फूड इंस्पेक्टर सैंपल लेते हैं।
बाद में यही सैंपल मानक में पाया जाता है। क्या इसकी जानकारी मंत्री को दी जाती है?
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- मीडिया को लेकर नहीं जाते। जहां सैंपल लिए जाते हैं, वहां किसी अन्य को जानकारी नहीं दी जाती।
मंत्री के जवाब पर विधायक ने कहा- मैं सैंपल लेने के विरोध में नहीं हूं, लेकिन सैंपल जांचने में फूड इंस्पेक्टर्स की भी बदनीयति है।
जब सैंपल लेकर ढिंढोरा पीटा जाता है, तो उस दुकान से कोई सामान लेने नहीं जाता। ये अधिकारी पूरी तरह से बेईमानी कर रहे हैं।
बीच में कांग्रेस विधायक बापू सिंह तंवर बोले- मिलावटखोरों से बनी हुई सरकार है। सत्ता पक्ष के विधायक अपनी पीड़ा बता रहे हैं।
मंत्री ने कहा- मैं विधायक जी से चर्चा कर लूंगा। शासन की ये कतई नीयत नहीं होती कि किसी व्यापारी को परेशान किया जाए।
विधायक रजौधा ने कहा- फूड विभाग के इंस्पेक्टर और अधिकारी सालों से जमे हुए हैं। ट्रांसफर होने के बाद जाते नहीं, कैंसिल करा लेते हैं।
मैं चाहता हूं कि सदन में मंत्री आश्वासन दें कि सैंपल भी ले लिए जाएं, उनकी जांच हो जाए और व्यापारी की बदनामी भी न हो।
मंत्री ने कहा- किसी भी अधिकारी का ट्रांसफर कैंसिल नहीं किया गया।
नेता प्रतिपक्ष का विधानसभा अध्यक्ष ने समर्थन किया
नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने विभागों से पत्रों का जवाब नहीं आने का मुद्दा उठाया।
कहा- पटवा जी की सरकार के बाद से ये परंपरा खत्म हो गई है।
सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारी आदेश की धज्जियां उड़ा रहे। पत्रों का जवाब नहीं देते।
विधानसभा अध्यक्ष ने भी नेता प्रतिपक्ष की बात का समर्थन किया। कहा- पत्रों के जवाब नहीं आते।
अध्यक्ष ने मंत्री से कहा- सामान्य प्रशासन विभाग को ताकीद करें कि वे विधायको के पत्रों का जवाब दें।
इसके अलावा बापू सिंह तंवर ने डॉक्टरों की कमी का मुद्दा उठाया।
कहा- सदन से निर्देश जारी करना चाहिए कि डॉक्टर को जल्द से जल्द जिले में पदस्थ किया जाए।
चांचौड़ा विधायक ने पूछा डॉक्टरों की कमी पर सवाल
प्रश्नकाल में चांचौड़ा से विधायक लक्ष्मण सिंह ने सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को लेकर सवाल पूछा।
सिंह ने कहा- सरकारी अस्पतालों को कोरोना काल में निजी क्षेत्रों को पीपीपी मॉडल पर देने का कोई प्रस्ताव है?
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. लक्ष्मण सिंह ने कहा- ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

