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जीवाजी विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था ब्लैक लिस्टेड सुरक्षा एजेंसी के हवाले

ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था जिम्मेदारी एक ब्लेक लिस्टेड कंपनी के ऊपर है। सुरक्षा व्यवस्था के अलावा मैन पॉवर की भी जिम्मेदारी इन्दौर की बालाजी सिक्योरिटी एजेंसी सवालों के घेर में है। जिस प्रकार से विभाग में संबंध रखने वाले कर्मचारियों को हटाने की तैयारी की जा रही है। जिसकी चर्चा जोरों पर है। विश्वविद्यालय पिछले लगभग 10-15 वर्षो तक सेवाये देने वाले कम्प्यूटर ऑपरेटरों को हटाने का फैसला ले चुकी है। इससे पूरे मामले में अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप  है। इसके साथ ही इस पूरे मामले में साहयक कुलसचिव की भूमिका संदिग्ध है। अभी भी जो गार्ड तैनात किये गये हैं उनको अभी तक इस कंपनी वेतन का भुगतान भी नहीं किया है।
सुरक्षा गार्डो से मिली जानकारी के अनुसार गार्डो को भी लगातार परेशान किया जा रहा है। बालाजी एजेंसी के कर्मचारी सिंह तो अपने वाहनों का पर कुछ कर्मचारियों को चलाने का काम किया है। ऐसा बताया जा रहा है कि नौकरी पर नये लोगों को रखने का मुख्य उद्देश्य अपने लोगों को उपकृत करना है। इससे कई वर्षो से सेवाये देने पर एक संदेह भी उत्पन्न होता है। इनमें से कुछ कर्मचारियों को नहीं हटाने के लिये अधिकारियों को पत्र भी लिखा है। जिनमें कहा गया है कि उन्होंने अपने काम का एक रिकॉर्ड उपलब्ध कराया है। उन्हें भी हटाने का प्रयास किया जा रहा है। बालाजी एजेंसी 55 वर्ष से अधिक सुरक्षा कर्मी रखे सुरक्षा गार्डो को हटा रही है जबकि मध्यप्रदेश शासन में कर्मचारियों की उम्र 62 नियत है।
बिजली विभाग से है ब्लैक लिस्टेड
बाला सिक्योरिटी एजेंसी पर पूर्व कर्मचारियों ने कई गंभीर आरोप लगाये है। कुछ वर्ष पहले इस एजेंसी के खिलाफ बिजली विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के कई मामले सामने आये थे। ऐसा बताया जा रहा है कि बिजली विभाग द्वारा बालाजी एजेंसी को ब्लैक लिस्टेड किया गया था इसके बावजूद विश्वविद्यालय में उसे ठेका दिये जाने पर सवालों के घेरे में है।
बीएल दुबे, आउटसोर्स कर्मचारी इंटक सचिव
एआर की मनमानी से हटाये जा रहे पुराने ठेका कर्मचारी
जीवाजी विश्वविद्यालय में सुरक्षा गार्ड एवं कम्प्यूटर ऑपरेटर के रूप में वर्षो से कार्य कर रहे कर्मचारियों को हटाकर नये लोगों को रखने की प्रक्रिया शुरू कर रही गयी है। यह आरोप है कि यह कार्यवाही कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से की जा रही है। कर्मचारियों ने बताया है कि बिना किसी ठोस वजह से उन्हें हटाया जा रहा है जबकि उनसे कम अनुभव वाले लोगों को बनाये रखा है।
जेयू में लंबे समय से कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों का कहना है कि उन्हें अचानक हटाने का निर्णय अन्यायपूर्ण है। उनका कहना है कि वर्षों तक सेवा देने के बावजूद उनकी उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और योग्य कर्मचारियों को बनाए रखने की मांग की है।
डॉ. विनोद राठौर, पूर्व छात्र नेता, जेयू

 

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