अब सिर्फ हॉलमार्क सोना बेच पाएगा सुनार, आधार कार्ड की तरह ज्वेलरी का होगा 6 अंकों का कोड
नई दिल्ली. दिसंबर 2022 की बात है। रोहन मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में एक सुनार से बिना हॉलमार्क वाला 2 तोले सोने की ज्वेलरी खरीदता है। कुछ दिनों बाद ही ये ज्वेलरी खराब होने लगती है। जब वह उसे वापस करने के लिए सुनार के पास गया, तो अब उसे उसी ज्वेलरी की आधी कीमत मिली। लेकिन, 1 अप्रैल 2023 के बाद ऐसा नहीं होगा। इसकी वजह ये है कि सुनार अब बिना हॉलमार्क टैग के सोना नहीं बेच सकेंगे।
बिना हॉलमार्क लगाए सुनार सोने की बनी कोई चीज नहीं बेच पाएंगे
आप सुनार से जो सोना खरीद रहे हैं, वह शुद्ध है या नहीं है। इसकी जांच भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS करती है। यह संस्था सोना, चांदी और दूसरी कीमती धातुओं से बनी ज्वेलरी या कलाकृतियों की जांच करती है। अगर धातु शुद्ध है तो इसे एक टैग दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को ही हॉलमार्क कहा जाता है। अब भारत सरकार ने आदेश जारी कर कहा है कि बिना हॉलमार्क लगाए सुनार सोने की बनी कोई चीज नहीं बेच पाएंगे।
सोने पर 6 अंकों का हॉलमार्क कोड होगा
भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। पहले नंबर पर चीन है। ऐसे में लोग असली समझकर नकली या कम शुद्ध सोना न खरीद लें। इसके लिए सोने की हॉलमार्किंग की जा रही है। हॉलमार्क वाले सोने की पहचान करना काफी आसान होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि जैसे आधार कार्ड पर 12 अंकों का कोड होता है, उसी तरह से सोने पर 6 अंकों का हॉलमार्क कोड होगा। इसे हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी HUID कहते हैं। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। इस नंबर के जरिए सोना को ट्रेस करके ये पता करना संभव होगा कि कोई सोना कितने कैरेट का है। अब ग्राहक ज्वेलरी खरीदने से पहले हॉलमार्क की जांच जरूर कर लें। देशभर में सोने पर ट्रेड मार्क देने के लिए 940 सेंटर बनाए गए हैं।

