नये वायरस की दस्तक से हो रही खांसी, सिरप नहीं कर रही हैं काम
नई दिल्ली. देश में बदलते मौसम के साथ यह महसूस किया गया है कि लोगांें में खांसी के मामले बहुत अधिक बढ़ रहे हैं। क्या यह किसी नये वायरस की दस्तक है। इस सवाल का जवाब ढूढ़ने के लिये आज तक की टीम ने कई डॉक्टरों से चर्चा की है। इस दौरान ICMR ने भी इस पर गाइडलाइंस जारी की है। अपने सवाल के जवाब पाने के लिये सबसे पहले हम पहुंचे जयपुर के डॉक्टर गोविंद शरण शर्मा के पास डॉक्टर गोविंद ने बताया है कि आज कल देखा गया है कि खांसी के ऐसे मामले सामने आ रहे हैं कि लोग कई महीने तक इस बीमारी से ठीक नहीं हो पा रहे हैं।
डॉ. गोविंद ने बताया है कि कोविड के बाद से यह तो देखने में आया है कि लोगों के खानपान में और उनकी सहन शक्ति में कमी आई है। इसके अलावा एक दूसरी कारण जो लोगों की सेहत पर फर्क डाल रही है। वह यह है कि मौसम में लगातार बदलाव देखे जा रहे हैं। सुबह और शाम के समय तो मौसम ठण्डा रहता है जबकि दिन में भयंकर गर्मी का मौसम महसूस किया जा रहा है।
क्या यह चिंताजनक है?
उल्लेखनीय है कि ICMR के विशेषज्ञों का इस मामले पर कहना है कि भारत में पिछले दो-तीन महीने से लगातार खांसी का कारण इन्फ्लुएंजा A सब वैरिएंट H3N2 है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के वैज्ञानिकों ने कहा कि एच3एन2, जो पिछले दो-तीन महीनों से व्यापक रूप से प्रचलन में है। अन्य सब वैरिएंट्स की तुलना में ज्यादा अस्पताल में भर्ती होने का कारण बन रहा है. यह वायरस रिसर्च का मुद्दा है। ICMR के विशेषज्ञों ने लोगों को वायरस से खुद को बचाने के लिए क्या करें और क्या न करें की एक सूची भी सुझाई है। वहीं दूसरी ओर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने देश भर में खांसी, सर्दी और मतली के बढ़ते मामलों के बीच एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध उपयोग के खिलाफ सलाह भी दी है।
खांसी नहीं जा रही, बुखार ठीक हो जा रहा है
IMA के मुताबिक मौसमी बुखार 5 से 7 दिनों तक रहेगा। आईएमए की एंटी-माइक्रोबियल रेसिस्टेंस के लिए स्थाई समिति ने कहा कि बुखार तीन दिनों में चला जाता है लेकिन खांसी तीन सप्ताह तक बनी रह सकती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक वायु प्रदूषण के कारण वायरल के मामले भी बढ़े है। यह ज्यादातर 15 वर्ष से कम और 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में होता है और बुखार के साथ ऐसे मामले ज्यादा उभर कर आ रहे है।

