खरगोन दंगे के बाद जागी शिवराज सरकार:4 महीने से लागू है संपत्ति नुकसान वसूली कानून, नियम बनाना भूल गए, अब बनाया ट्रिब्यूनल
खरगोन. खरगोन में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद सरकार जागी है। इस दंगे में कई प्राइवेट व सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है। अब आरोपियों से इस नुकसान की वसूली की जाएगी। जो ‘संपत्ति नुकसान वसूली कानून’ के तहत होगी। लेकिन, इस कानून के लागू होने के बाद सरकार नियम बनाना ही भूल गई। हालांकि मंत्रालय ने अब ट्रिब्यूनल गठित कर दिया है। सोमवार 11 अप्रैल से गृह विभाग के अफसर नियम बनाने में भी जुट गए। ट्रिब्यूनल का अध्यक्ष रिटायर्ड जिला जज शिवकुमार मिश्रा को बनाया गया है, जबकि सचिव के पद पर रिटायर्ड IAS प्रभात पाराशर की नियुक्ति की गई है।
सरकारी व निजी संपत्ति नुकसान की वसूली (संशोधन) विधेयक 2021 विधानसभा के शीतकालीन सत्र (24 दिसंबर 2021) के दौरान बहुमत से पारित हुआ था। इसके बाद इसका राजपत्र में प्रकाशन भी किया गया था। इसके मुताबिक मध्यप्रदेश में अब सांप्रदायिक दंगे, हड़ताल, धरना- प्रदर्शन या जुलूस के दौरान पत्थरबाजी करने वाले या सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ इस कानून के तहत एक्शन लिया जाएगा।
खरगोन दंगे के दौरान 30 से अधिक मकानों-दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया। इसके अलावा सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस ने अब तक 95 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके खिलाफ नए कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है। मंत्रालय सूत्रों ने बताया कि खरगोन दंगे के बाद नियम बनाने की प्रक्रिया तेजी से शुरू की गई है, ताकि आरोपियों से नुकसान की वसूली हो सके। हालांकि गृह विभाग के एक वरिष्ठ अफसर का कहना है कि सरकारी व निजी संपत्ति नुकसान की वसूली कानून लागू है, लिहाजा नियम नहीं बनने से कार्रवाई में किसी प्रकार की रुकावट नहीं आएगी।

