अटलबिहारी बाजपेई सभागार में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जितेन्द्र माहेश्वरी का किया अभिनंदन, बोले सीनियर से विनम्र रहे असफल न होने की सोचें
ग्वालियर. विधि व्यवसाय को अपनाने वाले अधिवक्ताओं को अपने सीनियर से विनम्र होकर सीखने की ललक के साथ काम करना चाहिए, उन्हें असफल होने पर चिंता नहीं करनी चाहिए। यह बात सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जस्टिस जितेन्द्र माहेश्वरी अटलबिहारी बाजपेई सभागार में बार एसोसियेशन द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में बोल रहे थे। इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति एएम खानविलकर का कहना है कि विभिन्न न्यायालयों में मामलों की बढ़ती पेंडेंसी को लेकर सभी को समन्वित प्रयास करने होंगे तभी इन मामलों का निराकरण हो सकेगा, क्योंकि अधीनस्थ न्यायालयों में दीवानी प्रकरण करीब सवा तीन लाख पेंडिंग है जबकि फौजदारी के 14 लाख से ज्यादा मामले लंबित है।
वकीलों को नसीहत, अनावश्यक रूप से वे मामले को स्थगित न कराए
इसी तरह हाईकोर्ट में लगभग ढाई लाख से ज्यादा मामले सिविल के लंबित है जबकि क्रिमिनल के डेढ़ लाख से ज्यादा मामले पेंडिंग चल रहे हैं, उन्होंने आगे कहा कि पूरे देश के परिपेक्ष में यह आंकड़ा कम है। मगर इन्हें खत्म करने के लिए हमें लंबित मामलों के लिए मेडिएशन और लोक अदालत जैसे सुविधाजनक रास्ते अख्तियार करना चाहिएं वहीं उन्होंने वकीलों को नसीहत देते हुए कहा कि अनावश्यक रूप से वे मामले को स्थगित नहीं कराएं। सुप्रीम कोर्ट जज खानविलकर जीवाजी विश्वविद्यालय के मल्टी आर्ट कांपलेक्स मंे शनिवार शाम को आयोजित सुप्रीम कोर्ट के जज जेके माहेश्वरी के अभिनंदन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्गर व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने न्यायमूर्ति माहेश्वरी के कार्य करने की शैली की तारीफ करते हुए कहा कि जरूरतमंद को सस्ता सुलभ और जल्द न्याय मिले। इसका उन्होंने हमेश प्रयास किया है साथ ही उन्होंने अपने दायित्वों को बखूबी पालन किया है। कार्यक्रम में जस्टिस माहेश्वरी का हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से सम्मान किया गया।
किसी झिझक की वजह से नवोदित वकीलों को हार नहीं माननी चाहिए
अपने अभिनंदन पर जस्टिस माहेश्वरी ने कहा कि विधि व्यवसाय को अपनाने वाले अधिवक्ताओं को अपने सीनियर से विनम्र होकर सीखने की ललक के साथ काम करना चाहिए। उन्हें असफल होने पर चिंता नहीं करनी चाहिए। उन्होंने अपने वकालत और हाईकोर्ट जज के रूप में कई अनुभव साझा किए और बताया कि अपनी गलती को बिना किसी झिझक के स्वीकार कर लेना चाहिए। इससे अधिवक्ताओं के आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त होता है। जस्टिस माहेश्वरी ने अपने उद्बोधन लिया और कहा कि किसी झिझक की वजह से नवोदित वकीलों को हार नहीं माननी चाहिए। उन्हें हमेशा अनुमान जी की तरह सूर्य से प्रेरणा लेने की कोशिश करना चाहिए क्योंकि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है। इस मौके पर जस्टिस माहेश्वरी का बार एसोसिएशन की ओर से अभिनंदन किया गया।
इस मौके पर सभागार में अभिनंदन समारोह के मंच पर मौजूद न्यायमूर्तिगणों को बार एसोसियेशन के अध्यक्ष एडवोकेट एमपीएस रघुवंशी ने स्मृति चिन्ह और शॉल श्रीफल देकर सम्मानित किया। इसके उपरांत सीनियर वकीलों का भी सम्मान किया गया।

