ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर कोरोना व्यवस्था बेकार, जांच टीम नहीं दिखाई दी, सिर्फ 1 गेट पर ही सैंपलिंग
ग्वालियर. दुनियाभर में कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की दहशत है, ग्वालियर में इसे लेकर डर है लेकिन प्रशासनिक अफसर लापरवाही बरत रहे है। ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर किस तरह के इंतजाम है इसे लेकर चेक किया गया। यहां बाहर से आने वाले यात्रियों से पूछताछ नहीं की जा रही। यात्री बेखौफ आ जा रहे है, कॉन्टैक्ट ट्रैसिंग तो दूर उनके नाम पते भी नोट नहीं किए जा रहे। स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 की साइड आने-जाने के लिए दो गेट है। पूछताछ केन्द्र की तरफ गेट पर टीम ही नहीं है। मुख्य दरवाजे की तरफ जब टीम पहुंची तो यहां एक टीम बैठी दिखाई तो दी पर आपस में मोबाइल पर ही चैट करते नजर आए और ट्रेनों से उतरने वालों से पूछताछ करने लगे साथ ही स्पॉट सैंपलिंग शुरू कर दी। टीम ने बताया कि शाम तक 1500 लोगों की सैंपलिंग का टारगेट है और पास ही वैक्सीनेशन टीम भी बैठी है, बिना वैक्सीन वालों को वैक्सीन लगा रही है।
सिर्फ एक गेट पर ही सैंपलिंग, पूछताछ
स्टेशन के मुख्य रूप से तीन गेट है, जिनमें से सिर्फ एक गेट पर सैंपलिंग के लिए टीम बैठी है लेकिन कॉन्टैक्ट ट्रैसिंग के लिए टीम नहीं है। प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर जाने के लिए दो दरवाजे है। टिकट विंडो वाले गेट पर सैंपलिंग के लिए टीम बैठी है। जो आने-जाने वालों की सैंपलिंग कर रही है लेकिन इसके पास ही पूछताछ केन्द्र ही तरफ से दूसरा गेट है। यहां से भी यात्री आते-जाते है लेकिन यहां टीम नहीं है। एक खाली चेयर बनी है लेकिन उसमें भी कोई बैठा नजर नहीं आया इसके अलावा, प्लेटफॉर्म नंबर 4 की ओर दूसरा तीसरा गेट है, यहां भी सैंपलिंग या पूछताछ के लिए टीम नहीं है।
संक्रमितों के सैंपल जीनोम सिक्वेसिंग के लिए अब तक नहीं भेजे
कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन का खतरा पूरे देश पर मंडरा रहा है। इसके बाद भी ग्वालियर में कोरोना मामलों में लापरवाही बरती जा रही है। दरअसल कोरोना संक्रमित मिलने वाले हर मरीज का सैंपल जीनोम सिक्वेसिंग के लिए दिल्ली लैब भेजा जाना हैए लेकिन दो दिन में मिले 4 संक्रमितों का सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए न तो भेजा गया और न ही उनकी संपर्क हिस्ट्री तलाशी गई। स्वास्थ्य विभाग का यह लापरवाही रवैया शहर में कोरोना को बढ़ावा दे सकता है। केंद्र से मिले निर्देश के अनुसार संक्रमित मिलने वाले हर मरीज में काैन सा वायरस हैए इसका पता लगाने के लिए जीनोम सिक्वेसिंग कराना आवश्यक है। जिसके चलते संक्रमित मिलने वाले हर मरीज का सैंपल जांच के लिए दिल्ली भेजा जाना आवश्यक हैए लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।

