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जन्माष्टमी के मौके पर 100 करोड़ के जेबरातों से सजेंगे राधा-कृष्ण, 100 जवानों की सुरक्षा में रहेंगें भगवान राधा-कृष्ण

ग्वालियर. मप्र के ग्वालियर में एक मंदिर ऐसा भी है। जहां जन्माष्टमी पर भगवान राधा-कृष्ण के विग्रह को बेशकीमती गहने पहनाये जाते हैं। यह सिंधिया रियासत के सैकड़ों वर्ष पुरान कीमती गहने हैं। इन पर मोतियों की जगह हीरे, पन्ना, माणिक, पुखराज और नीलम जड़े हुए हैं। वर्तमान में कीमत लगभग 100 करोड़ रूपये (एक अरब) के लगभग बताई जाती है। इनमें सोने का मुकुट, हीरे का हार, पन्ना जडि़त गहने की सुरक्षा भी किसी किले की सुरक्षा की तरह होती है। इन बेशकीमती जेवरातों को बैंक लॉकर से मंदिर तक लाने और अगले दिन पूरी गणना कर बैंक तक वापिस पहुंचाने के बीच लगभग 100 जवानों की सुरक्षा रहती है।

वर्ष 2007 से फिर होने लगा राधाकृष्ण का श्रृंगार
मंदिर से जुड़े गोपाल कुमार बताते हैं कि सिंधियाराज घराना ही मंदिर की देख-रेख करवाते थे। आजादी के समय यह बेशकीमती गहने भारत सरकार के सुपुर्द कर मंदिर को उन्हें सौंप दिया गया था। उसके बाद इन इन गहनों, मुकुट पर किसी का ध्यान ही नहीं गया, लेकिन साल 2007 में नगर निगम आयुक्त पवन शर्मा को निगम की इस संपत्ति के बारे में पता लगा। जिस पर उन्होंने गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी के दिन भगवान राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं का इन गहनों से शृंगार कराने की परंपरा शुरू कराई। राधा-कृष्ण 100 करोड़ से ज्यादा के गहने पहनते हैं। लिहाजा यहां कड़ी सुरक्षा रहती है।

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