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पेट्रोल-डीजल की बेलगाम कीमतों को कंट्रोल करने के लिये सरकार ने बुलाई बैठक

नई दिल्ली. पेट्रोल-डीजल की बेलगाम कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। तेल की आसमान पर पहुंची कीमतों का कारण से देश में महंगाई दर भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर है। सरकार भी साफ कर चुकी है कि वह पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर कुछ नहीं कर सकती। क्योंकि यह पूरी से ग्लोबल मार्केट के हवाले है। यानी जिस हिसाब से दुनिया में कच्चा तेल घटेगा बढ़ेगा। वैसे ही पेट्रोल और डीजल के दाम भी घटेंगे और बढ़ेंगे और कच्चा तेल लगातार महंगा हो रहा है।
वसूलती हैं भारी टैक्स केंद्र और राज्य सरकारें
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पेट्रोल की कीमतों में 60 %  हिस्सा सेंट्रल एक्साइज और राज्यों के टैक्स का होता हैए जबकि डीजल में ये 54 %  होता है। पेट्रोल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी 32.90 रुपये प्रति लीटर है। जबकि डीजल पर 31.80 रुपये प्रति लीटर है। पेट्रोल डीजल की कीमतों में आमतौर पर रोज बदलाव होता है। ये कीमतें बेंचमार्क अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों और फॉरेन एक्सचेंज रेट के आधार पर तय होती हैं। यानी साफ है कि जबतक केंद्र और राज्य सरकारें टैक्स कम नहीं करती हैं। आम आदमी को महंगाई से राहत मिलना मुश्किल है।
पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर बैठक
इस दौरान ईधन की दाम घटाने की भी तैयारी शुरू हो गयी है। पार्लियामेंट्री स्टैडिंग कमेटी ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ते दामों पर एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गयी है। इस बैठक में पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के साथ-साथ देश की सरकारी तेल कंपनियों आईओसी, बीपीसीएल और एमपीसीएल के अधिकारियों को भी बुलाया गया है। यह बैठक इसी माह 17 जून को होनी है। बैठक में तेल की बढ़ती कीमतों की वजह, उसका हल निकालने पर चर्चा की जायेगी। इस बाद पर भी विचार होगा कि क्या कोई रास्ता है। जिससे कीमतें घटाई जा सकें या किसी भी तरह से लोगों को थोड़ी राहत दी जा सकें। स्टैडिंग कमेटी की ओर इस बैठक में पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स, नैचुरल गैस की मौजूदा प्राइसिंग, मार्केटिंग और सप्लाई को लेकर जानकारी मांगी जायेगी। इस बैठक की अगुवाई रमेश बिधूड़ी करेंगे।
सरकार ने हाथ खड़े किये
आपको बता दें कि देश के 7 राज्यों में इस समय पेट्रोल 100 रूपये प्रतिलीटर के पार पहुंच गया है। राजस्थान के श्रीगंगानगर में तो डीजल भी 100 रूपये के पार जा चुका है। ऐसे में देश में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का कहना है कि यह चिंता की बात है। लेकिन विकास कार्यो के लिये केन्द्र और राज्य सरकारों को पेट्रोल, डीजल पर टैक्स से अतिरिक्त पैसों की जरूरतों होती है। ऐसे में यह तो साफ है कि सरकार ईधन पर टैक्स कम करने वाली नहीं है। लेकिन सरकार पेट्रोल डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने को तैयार है। पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उसके बाद धर्मेन्द्र प्रधान भी कह चुके हैं। कि राज्य अगर चाहेंगे तो ऐसा हो सकता है। लेकिन पिछले दिनों हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में पेट्रोल-डीजल को लेकर कोई चचा्र अभी तक नहीं हुई है।

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