नेपाल में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में 898 कर्मचारी फंसे, 6 इंच के पाइप से पहुंचाई जा रही हवा

नई दिल्ली. नेपाल में बाढ के बाद हाईड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। करीब 898 कर्मचारी अब भी फंसे है जबकि 361 कर्मचारियों को अब तक बचाया जा चुका है। त्रिशूली-3 ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में कुछ कामयाबी मिली है। बचावकर्मी मशीनों की मदद से मिट्टी और गाद हटा रहे है। सुरंग में 6 इंच का छेद कर पाइप के जरिए हवा पहुंचाई जा रही है। अब इसे बडा कर मैनहोल बनाने की तैयारी है ताकि बचाव दल सुरंग के अंदर जाकर लोगों की तलाश कर सके। 26 अगस्त को नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशुली नदी में अचानक बाढ आ गई थी। इस आपदा में नेपाल में अब तक 734 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं तिब्बत में मरने वालों का आंकडा 16 पहुंच गया है।

नेपाल में बाढ़ के तीन दिन बाद भी रेस्क्यू और सर्च ऑपरेशन जारी रहा। लोग तबाह हुए अपने घरों को देखने भी गए। - Dainik Bhaskar
चीन ने 1950 के दशक में तिब्बत को अपने नियंत्रण में ले लिया था। तब से तिब्बत चीन के सबसे ज्यादा निगरानी वाले औश्र कडे नियंत्रण वाले इलाकों में शामिल है। बाढ की इस आपदा को चीन सरकार कितनी गंभीरता स ेले रही है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद राहत और बचाव के लिए निर्देश दिए है। प्रधानमंत्री ली छियांग भी गुरूवार को घटनास्थल पर पहुंचे। किसी बडी आपदा के तुरंत बाद उनका इस तरह मौके पर पहुंचना काफी दुर्लभ माना जाता है।

नेपाल के देवीघाट में त्रिशूली नदी के किनारे बाढ़ में तबाह हुए घरों का एरियल व्यू।
तिब्बत में पहुंचना विदेशी लोगों के लिए आसान नहीं है। वहां जाने के लिए विशेष वीजा की जरूरत होती है और विदेशी मीडिया के लिए वहां प्रवेश करना बेहद मुश्किल है। वहां मौजूद लोगों से सीधे संपर्क करना भी आसान नहीं है। नेपाल से तिब्बत होते हुए पवित्र कैलाश पर्वत की यात्री करने वाले तीर्थयात्रियों के लिए भी कई तरह की मंजूरियां जरूरी होती है। उन्हें कुल चार अलग-अलग परमिट लेने पडते है। यहीं वजह है कि तिब्बत में इस समय वास्तव में क्या हो रहा है इसकी स्वतंत्र जानकारी जुटाना मुश्किल है।

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