सिंधिया राजघराने के 37 साल पुराने विवाद का अंत, ज्योतिरादित्य और तीनों बुआ में बनी सहमति
ग्वालियर. सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड रुपये से अधिक की संपत्ति को लेकर लगभग 4 दशक से चला आ रहा पारिवारिक विवाद अब समाधान की ओर बढ गया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआ वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे तथा ऊषा राजे के बीच संपत्ति बंटवारे को लेकर हुए आपसी समझौते की औपचारिक प्रक्रिया 8 जुलाई को न्यायालय में पूरी की जाएगी। इसके लिए ये दोनों पक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। बता दें कि वसुंधरा राजे राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री है जबकि यशोधरा राजे मध्य प्रदेश में मंत्री रह चुकी है।
समझौते का प्रार्थनापत्र ग्वालियर जिला न्यायालय में प्रस्तुत किया
उल्लेखनीय है कि न्यायालय के निर्देशों के बाद दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने पर राजी हो गए है। समझौते का प्रार्थनापत्र ग्वालियर जिला न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है। न्यायालय ने पिछली सुनवाई के दौरान पक्षकारों को राजीनामा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे और 90 दिनो के भीतर पूरे विवाद का समाधान कर उसकी पालन प्रतिवेदन रिपोर्श्ट दाखिल करने को कहा था। यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि निर्धारित समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो संबंधित याचिका को पुनः बहाल किया जा सकता है।
देशभर में फैली है राजघराने की संपत्ति
सिंधिया राजघराने की बेशुमार संपत्ति कई शहरों में है। इनकी कीमत का आकलन करीब 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक किया जा रहा है। इनमें ग्वालियर में लगभग 12.40 लाख वर्गफीट क्षेत्रफल वाला जयविलास पैलेस प्रमुख है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 10 हजार करोड़ रुपये बताई जाती है। इसके अलावा आजादी के समय सिंधिया परिवार की 100 से अधिक कंपनियों के शेयर, शिवपुरी स्थित माधव विलास पैलेस, हैप्पी विलास और जार्ज कैसल कोठी, उज्जैन का कालियादेह पैलेस, दिल्ली का ग्वालियर हाउस, राजपुर रोड का प्लॉट और सिंधिया विला, पुणे का पद्म विलास पैलेस, वाराणसी का सिंधिया घाट तथा गोवा स्थित विठोबा मंदिर सहित अन्य संपत्तियां भी इस विवाद का हिस्सा हैं।

