संबंध सुधारों तभी गंगा का जल मिलेगा, 30 साल पुरान फरक्का संधि के रीन्यूअल पर अड़ा बांग्लादेश
नई दिल्ली. बांग्लादेश और भारत के बीच संबंधों के बीच एक बार फिर पानी बड़ा मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। ढाका में आयोजित एक कार्यक्रम में बांग्लादेश की सत्तारूढ़ पार्टी बीएनपी क महासचिव और ग्रामीण विकास मंत्री मिर्जा फखरूल इस्लाम आलमगीर ने साफ कहा है कि भारत के अच्छे रिश्तों का भविष्य अब गंगा जल बटवारा समझौते पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा है कि दिसम्बर 2026 में खत्म हो रही गंगा वाटर शेयरिंग ट्रीटी को नये सिरे से बाग्लादेश की उम्मीदों और जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाना चाहिये।
आलमगीर ने कहा है कि ढाका-भारत को एक स्पष्ट संदेश देना चाहता है कि नयी संधि पर जल्द बातचीत शुरू होनी चाहिये। उनका कहना था कि जब तक नया समझौता नहीं हो जाता है तब तक पुरानी संधि का जारी रखा जाये। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में जल बटवारे के समझौते किसी तय समय सीमा तक सीमित नहीं होने चाहिये।
हाल ही में बांग्लादेश सरकार ने पद्मा नदी पर एक बड़े बैराज प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। यह प्रोजेक्ट 2033 तक पूरा होने की उम्मीद है. ढाका का कहना है कि इसका मकसद फरक्का बैराज के “नकारात्मक प्रभाव” को कम करना है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे नदी में गाद जमा होने और जलस्तर बढ़ने की समस्या और गंभीर हो सकती है।
इससे पहले BNP नेताओं ने तीस्ता जल समझौते को लेकर भी पश्चिम बंगाल की राजनीति पर निशाना साधा था. BNP के नेताओं ने आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी की सरकार की वजह से भारत-बांग्लादेश के बीच तीस्ता समझौता अटका हुआ है। साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई थी कि इससे तीस्ता वार्ता आगे बढ़ सकती है।
भारत की तरफ से फिलहाल यही कहा गया है कि दोनों देशों के बीच जल विवादों को सुलझाने के लिए पहले से कई द्विपक्षीय तंत्र मौजूद हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और बांग्लादेश 54 साझा नदियों से जुड़े मुद्दों पर नियमित बातचीत करते रहते हैं. लेकिन जिस तरह से BNP सरकार ने अब गंगा समझौते को सीधे रिश्तों से जोड़ दिया है, उससे आने वाले महीनों में पानी की राजनीति दोनों देशों के रिश्तों में बड़ा मुद्दा बन सकती है।

