पूर्व कलेक्टर अशोक वर्मा के खिलाफ अवमानना नोटिस, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्य सचिव के जरिये नोटिस तामिल कराये, आदेशों की अवहेलना पर हाईकोर्ट जताई नाराजगी
ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने ग्वालियर के पूर्व कलेक्टर अशोक वर्मा के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किये गये है। हाईकोर्ट ने राज्य शासन की कार्यशैली पर नाराजगी व्यक्त करते हुए टिप्पणी की है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के आवजूद राज्य के अधिकारी जानबूझ कर अपील में देरी कर रहे हैं। जो कि एक गंभीर मामला है। यह नोटिस मुख्य सचिव के जरिये से तामील करायें जायेंगे।
हाईकोर्ट ने इसे अधिकारियों को बचाने का सीधा प्रयास बताया है कि वर्ष 2012 से 2018 के दौरान एक प्रकरण में 10 आफिसर (ओआईसी) शामिल रहे हैं। लेकिन जांच का आश्वासन दिये जाने जाने के बावजूद उनके खिलाफ आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई । पूर्व कलेक्टर अशोक वर्मा ने भी हलफनामा देकर जांच कराने का आश्वासन दिया था। बाद मेंकार्यवाही नहीं होने से हाईकोर्ट ने अदालत के साथ धोखाधड़ी माना है।
क्या है मामला
ग्वालियर स्थित 5.19 बीघा जमीन से संबंधित है। इस जमीन का फैसला 19 अप्रैल 2000 को योगेश और अन्य के पक्ष में सुनाया गया था। राज्य शासन की अपीलें अतिरिक्त सत्र न्यायालय (2003) और हाईकोर्ट (2009) से भी पहले ही खारिज हो चुकी थीं। इसके बावजूद, राज्य शासन ने 2009 की सेकेंड अपील को पुनः सुनवाई में लाने के लिए 3,327 दिन की अत्यधिक देरी से आवेदन प्रस्तुत किया था।
राज्य शासन द्वारा 30 नवंबर 2025 को पेश की गई रिपोर्ट में अपर कलेक्टर सीबी प्रसाद (तत्कालीन एसडीएम) और अश्वनी रावत (तत्कालीन ओआइसी) को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया था। हालांकि, 3 माह बीत जाने के बाद भी इनके खिलाफ चार्जशीट जारी नहीं हुई है। कोर्ट ने अब दोषी अधिकारियों पर चार्जशीट और अन्य OIC अधिकारियों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को निर्धारित की गई है। हाईकोर्ट ने विशेष रूप से दो सवालों के जवाब मांगे हैं: दोषी पाए गए अधिकारियों पर चार्जशीट जारी हुई है या नहीं, और अन्य ओआइसी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी या नहीं।

