लोक वाद्यों की धुन से हुआ नए साल के सूर्य का स्वागत, बंगाली समाज द्वारा देवी स्तुति
संस्कार भारती और नगर निगम द्वारा रौद्रनाम नव संवत्सर का स्वागत गुरुवार को हुआ
ग्वालियर. तैरते हुए मंच पर लोक वाद्यों की धुन पारंपरिक नृत्य और संगीत की ध्वनि से नव संवत्सर का स्वागत करते युवा कलाकार तो दूसरी तरफ अर्घ्य देकर नव वर्ष के सूर्य का स्वागत भी शहरभर के लोगो द्वारा किया गया।
ये सब देखने को मिला जल विहार प्रांगण में जहां गुरुवार को रौद्रनाम नव संवत्सर 2083 का स्वागतोत्सव हुआ। संस्कार भारती और नगर निगम की ओर से यह कार्यक्रम दो चरणों में हुआ। पहला चरण सुबह स्वागतोत्सव के रूप में तो दूसरा लोक कला महोत्सव के रूप में संपन्न हुआ। दोनों ही चरणों में भारतीय कला और संस्कृति की झलक दिखाई दी।सुबह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में बुरहानपुर से आए कलाकार गजानन वारुडे ने राग वैरागी मध्य लय, द्रुत ताल में
बंगाली समाज द्वारा देवी स्तुति
अद्भुत शहनाई वादन कर सबका मन मोह लिया। उन्होंने पहाड़ी धुन की मनमोहक प्रस्तुति दी। बंगाली समाज द्वारा देवी स्तुति पर आगोमनी की प्रस्तुति हुई, जिसमें मां दुर्गा के रूपो को मंच से प्रदर्शित किया गया। मंच से दतिया के कलाकारों ने लोकवाद्य कचहरी का सुंदर प्रस्तुतीकरण किया। विनोद मिश्र और उनके साथियों द्वारा प्रस्तुत इस कचहरी में तुरही, शंख, झालर, नागफनी, इकतारा आदि दुर्लभ वाद्ययंत्रों से सूर्य का अभिवादन किया गया।
क्रम को आगे बढ़ाते हुए रवीन्द्र कुलश्रेष्ठ ने मधुर बांसुरी वादन पेश किया। नृत्य समूह द्वारा पारंपरिक परिधानों में शिव स्तुति की अद्भुत प्रस्तुति हुई। नृत्य के क्रम में कलाकारों द्वारा भगवान विष्णु के अवतारों को मंच से प्रदर्शित किया गया। युवा कलाकारों की ओर से लांगुरिया की शानदार प्रस्तुति हुई।युवा कलाकारों द्वारा पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता, नगर निगम पीआरओ मधु सोलापुरकर मौजूद रहे। संस्कार भारती की ओर से संभाग प्रमुख शेखर दीक्षित, महामंत्री चंद्रप्रताप सिकरवार सहित उमाशंकर कुलश्रेष्ठ, प्रचार प्रमुख कुलदीप पाठक आदि मौजूद रहे।

