जनता गैस की लाईन में, भाजपा सरकार चुनाव प्रचार में मस्त, सिलेंडर हुआ महंगा, रसोई हुई ठंडी- कांग्रेस
ग्वालियर, 17 मार्च। घरेलू एवं व्यवसायिक गैस सिलेंडरों की कीमतों में की गई बढ़ोतरी, गैस वितरण में कालाबाजारी मुनाफाखोरी और बेकाबू महंगाई के विरोध में कांग्रेस के आह्वान पर शहर जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र यादव के नेतृत्व में 17 मार्च को शाम 4 बजे नदी गेट से पाटनकर बाजार तक विशाल हल्लाबोल जंगी प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों एवं आम नागरिकों ने भाग लेकर केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने बढ़ती महंगाई, गैस सिलेंडरों की कीमतों में वृद्धि, मुनाफाखोरी, कालाबाजारी से आम जनता पर पड़ रहे आर्थिक बोझ के खिलाफ हाथ ठेले पर सिलेंडर, कंडे, लकड़ी रखकर, थाली बजाकार, जोरदार ओ नरेंदर, दे सिलंेडर। भाजपा हटाओ, महंगाई मिटाओ। गैस किल्लत बंद करो, जनता को सिलेंडर दो गगनभेदी नारे लगाए। हल्लाबोल आंदोलन का संचालन महादेव अपोरिया ने एवं आभार व्यक्त संजय सिंह राठौर ने किया।
अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार की गलत नीतियों के कारण गरीब, मजदूर और मध्यम वर्ग की स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है और लोगों के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है। सरकार गैस सिलेंडर की कमी को दूर करने के बजाय बुकिंग प्रक्रिया को जानबूझकर धीमा कर रही है, जिससे गैस किल्लत को कम दिखाया जा सके, आज हालात यह हैं कि आम नागरिक अपना काम-धंधा छोड़कर घंटों गैस एजेंसियों के बाहर लाइन में खड़े रहने को मजबूर है।
इस समय जहां एक ओर हिंदू समाज के प्रमुख त्योहार नवरात्रि और गनगौर’ आने वाले हैं, वहीं मुस्लिम समुदाय का पवित्र माह रमजान चल रहा है रोजे रखे जा रहे हैं और जल्द ही ईद का पर्व आने वाला है। ऐसे पवित्र समय में सिलेंडर न मिलने से त्योहार कैसे मनाएंगे? शादियों, इफ्तार और उत्सवों के भोजन के लिए परिवारों को लंबी कतारों में खड़े होना पड़ रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में गैस सिलेंडर की कमी और महंगाई ने लोगों के त्योहारों की खुशियों पर ग्रहण लगा दिया है। गैस सिलेंडर की कमी के कारण गरीबों और जरूरतमंदों को सस्ते दाम में भोजन उपलब्ध कराने वाले दीनदयाल रसोई और जगह-जगह गरीब, बेसहारा बर्ग केा मुफ्त भोजन कराने वाले लंगर भी बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।

