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महापौर निधि रोकने पर हाईकोर्ट में लगी याचिका से नहीं मिली राहत, राज्य शासन से मांगा जवाब

ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ की एकल पीठ में याचिका दायर की है। गुरूवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी जवाब मांगा है। महापौर निधि बंद किये जाने के ओदश के खिलाफ का मामला है।
दरअसल, नगरनिगम के बजट में 10 करोड़ रूपये की महापौर निधि का प्रावधान किया गया था। इस दौरान नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपसचिव प्रमोद शुक्ला ने आदेश जारी कर इस निधि पर रोक लगा दी थी। आदेश के बाद नगरनिगम में हड़कम्प की स्थिति बन गयी। हालांकि हाईकोर्ट ने फिलहाल महापौर निधि बन्द किये जाने के निर्णय पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा है कि शासन का जवाब आने के बाद ही रोक लगाने के आवेदन पर आगे सुनवाई 18 मार्च की जायेगी।
महापौर बोली
महापौर डॉ. शोभा सिकरबार ने हाईकोर्ट में तर्क दिया गया है कि जब सभापति और पार्षदों को विकास कार्यो के लिये निधि दी जाती है तो महापौर की निधि पर रोक लगाना उचित नहीं है। महापौर को भी शहर के विकास कार्य कराने की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में निधि पर रोक लागना गैर कानूनी है। अब इस मामले में राज्य शासन के जवाब के बाद ही अगली सुनवाई में तय होगा कि महापौर निधि पर लगी रोक जारी रहेगी या नहीं।

 

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