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बांग्लादेश में अखबारों के ऑफिस जल रहे थे, चुपचाप देख रही थी पुलिस

नई दिल्ली. बांग्लादेश में भीड़तंत्र काम कर रहा है। जहां पुलिस स्थिति को संभालने में असफल दिखाई दे रही है। इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में भड़की हिंसा से भारी नुकसान हुआ है। पिछले गुरुवार को दंगाईयों ने बांग्लादेश के 2 प्रमुख अखबारों के दफ्तर को आग के हवाले कर दिया। पुलिस वहां खड़ी देखती रही लेकिन दंगाईयों को रोकने की कोशिश नहीं की है।
अब ढाका महानगर पुलिस के एडिश्नल पुलिस कमिश्नर (क्राइम एंड ऑपरेशंस) एसएन एमडी नजरूल इस्लाम ने बताया है कि भीड़ हिंसा के खिलाफ पुलिस ने सख्ती से कार्यवाही इसलिये नहीं की। क्योंकि पुलिसकर्मियों के निशानाल बनने का डर था। उन्होने बताया कि करवान बाजार में प्रथम आलो और द डेली स्टार के कार्यालयों पर हुए हमलों, तोड़फोड़ और आगजनी के दोरान अगर पुलिस हस्तक्षेप करती तो गोलीबारी हो सकती थी। जिससे 2-4 लोगों की मौत भी हो सकती थी।
ACP  ने क्या कहा?
जब उनसे पूछा गया कि क्या DMP प्रथम आलो, द डेली स्टार और उदिची पर हुए हमलों को रोकने में सक्षम थी, तो नजरुल इस्लाम ने कहा, ‘हम सक्षम हैं।  यह नहीं कि हम हर घटना को रोक सकते हैं।   पिछले अनुभवों के आधार पर, जब जनभावना भड़क जाती है तो राज्य अधिकतम संसाधनों का इस्तेमाल करता है।   करवान बाजार की घटना वाले दिन अगर हम हस्तक्षेप करते, तो गोलीबारी हो सकती थी और संभवतः दो से चार लोगों की जान जा सकती थी, इसके बाद पुलिस पर भी हमले होते.’ उन्होंने आगे कहा, ‘उस दिन दो-चार पुलिसवाले मारे जाते… आप जानते हैं कि पुलिस बल एक साल पहले ही एक बड़े आघात से गुजरा है और हम फिर से खड़ा होने की कोशिश कर रहे हैं. चुनाव आने वाले हैं. अगर पुलिस बल में फिर कोई हताहत होता, तो मैं इस बल के साथ आगे नहीं बढ़ पाता. इसी कारण हम वहां कार्रवाई में नहीं जा सके. किसी भी मानव जीवन की हानि नहीं हुई. इतनी बड़ी घटना में भी जान-माल का नुकसान न होना, मैं इसे हमारी उपलब्धि मानता हूं।’

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