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सृजनपर्व – सितंबर 2025 : नारी शक्ति का उत्सव, कला, संस्कृति और शक्ति का अद्वितीय संगम


ग्वालियर: राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण विभाग द्वारा आयोजित मासिक सांस्कृतिक श्रृंखला “सृजनपर्व” तानसेन सभागार में भव्यता और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस माह की थीम थी “नारी शक्ति”, जिसकी परिकल्पना एवं संयोजन डॉ. अंजना झा (डीन, छात्र कल्याण) ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुई। मंच पर मुख्य अतिथि डॉ. महिमा तारे, कुलगुरु डॉ. स्मिता सहस्रबुद्धे और कुलसचिव की गरिमामयी उपस्थिति रही।
प्रस्तुतियाँ
स्वरवाद्य विभाग – “शक्ति आह्वान” शीर्षक प्रस्तुति में सितार, वायलिन, बाँसुरी और तबला का अद्भुत संगम हुआ। संगीत निर्देशक डॉ. श्याम रस्तोगी के मार्गदर्शन में स्वर और लय की गूंज ने सृष्टि और देवी शक्ति का आभास कराया। कत्थक नृत्य विभाग – विभाग की प्रस्तुति “महिषासुर मर्दिनी” कार्यक्रम की विशेष आकर्षण रही। देवी दुर्गा और महिषासुर के युद्ध प्रसंग को जिस जीवंतता और भावप्रवणता से प्रस्तुत किया गया, उसने पूरे सभागार को रोमांचित कर दिया।
डॉ. अंजना झा के निर्देशन में कामाक्षी शर्मा, साक्षी अरोरा, संजना भारद्वाज, नेहा जेरोनिया, नंदिनी जेरोनिया, अनन्या और प्रथा उपाध्याय ने ताल, लय और अभिव्यक्ति का अद्भुत संगम पेश किया। प्रत्येक आंदोलन में शक्ति, साहस और नारीत्व की गरिमा झलक रही थी। तेज़ चक्कर, नृत्याभिनय और भावपूर्ण मुद्राओं ने दर्शकों को बाँध लिया। यह प्रस्तुति न केवल एक नृत्य थी, बल्कि नारी की विजयगाथा का सशक्त सांस्कृतिक चित्रण थी, जिसने कार्यक्रम की आत्मा को परिभाषित किया।
चित्रकला एवं मूर्तिकला विभाग – विद्यार्थियों ने नारी शक्ति पर आधारित पेंटिंग्स और शिल्प का भव्य प्रदर्शन किया।
मूर्तिकला विभाग: रुचि जादौन, प्रतीक सिंह, नागवंशी, अमित तोमर, कुलदीप ठाकुर
चित्रकला विभाग: वैष्णवी गर्ग, अभिषेक कुमार अलख, अनस खान, आस्था राठौर, योगिता, अन्वेष सोनी, साक्षी तोमर, तनिष्क सिंह, कुशवाह, स्नेहा गुप्ता, प्रिया कुशवाह, साक्षु कुशवाह, विनय, रूपल माहौर, नुशरा, ऋतिका, सिद्धार्थ, वेदांत शिशांक
समापन
मुख्य अतिथि डॉ. महिमा तारे ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता और ऊर्जा की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह आयोजन नारी शक्ति की सच्ची अभिव्यक्ति है।कुलगुरु डॉ. स्मिता सहस्रबुद्धे ने आशीर्वचन देते हुए विद्यार्थियों को सतत सृजनशीलता बनाए रखने का संदेश दिया।अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए और राष्ट्रगान की गूंज के साथ कार्यक्रम की गरिमामयी पूर्णाहुति हुई।
सारांश
“सृजनपर्व” का यह दूसरा संस्करण कला, संस्कृति और नारी शक्ति का अनुपम संगम सिद्ध हुआ। विशेषकर कत्थक नृत्य विभाग की ‘महिषासुर मर्दिनी’ प्रस्तुति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक ऊँचाई प्रदान की। यह आयोजन नारी शक्ति का उत्सव ही नहीं, बल्कि युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा, ऊर्जा और सांस्कृतिक चेतना का स्रोत बन गया।

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