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जिला न्यायालय का फैसला हाईकोर्ट ने किया रद्द, संभागायुक्त पुनः फैसला करेंगे

ग्वालियर. नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) और भूमि मालिकों के बीच चल रहे मुआवजा विवाद में ग्वालियर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। न्यायालय ने शिवपुरी के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के आदेश को रद्द करते हुए मामले को पुनः मध्यस्थ (ग्वालियर संभागायुक्त) को भेज दिया है।
ममला राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-3 एबी रोड के चौड़ीकरण से जुडा हुआ है। वर्ष 2011-12 में शिवपुरी जिले की कोलारस तहसील के रामलता समेत अन्य गांवों की भूमि अधिग्रहित की गयी थी। जून 2013 में उपखंड अधिकारी ने मुआवजा तय किया था। असंतुष्ट किसानों ने 2014 में ग्वालियर संभागायुक्त कार्यालय के समक्ष अपील की। लेकिन अक्टूबर 2017 में मध्यस्थ ने किसानों की याचिका खारिज कर दी थी।
संभागायुक्त प्रकरण में पुनः फैसला सुनायेंगे
अब हाईकोर्ट ने किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए धारा 37 के तहत अपने विशेष अपीलीय अधिकार का प्रयोग किया और असाधारण परिस्थिति मानते हुए मामला दोबारा मध्यस्थ के पास भेज दिया। अब ग्वालियर संभागायुक्त सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नये सिरे से फैसला करेंगे।
जिला अदालत ने निरस्त कर दिया था संभागायुक्त का आदेश
इसके बाद किसानों ने जिला अदालत का दरवाजा खटखटाया। अतिरिक्त जिला जज ने मध्यस्थ का आदेश निरस्त कर मामला वापस भेज दिया। इस आदेश को एनएचएआई ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिला अदालत को मामला वापस भेजने का अधिकार नहीं था। कानून के अनुसार अदालत केवल मध्यस्थ के निर्णय को बरकरार रख सकती है या रद्द कर सकती है।

 

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