शनि मंदिर परिसर में विराजने वाली ऋषियों की मूर्तियां ग्वालियर में हो रही तैयार, प्रसिद्ध ऋषियों और संतो की मूर्तियां स्थापित होंगी

ग्वालियर के मोतीमहल परिसर स्थित रीजनल आर्ट एंड क्राफ्ट डवलपमेंट सेंटर के परिसर में निर्णाधीन ऋषियों व संतों की 12 प्रतिमाओं की मजबूती का खास ध्यान रखा जा रहा है। मूर्तिकार द्वारा अच्छी तरह से जांच के बाद के ही इन्हें शनि मंदिर ऐंती में स्थापित किया जायेगा। हाल ही में मंबई में शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिरने की घटना के बाद सावधानी बरती जा रही है। इससे पहले गत वर्ष उज्जैन के महाकाल लोक में ऋषियों की प्रतिमा गिरने से भी बड़ा विवाद हो गया था।
गौरतलब है कि राज्य के अलग-अलग जिलों में विशेष मंदिरों का विस्तार किया जा रहा है। उसी प्रकार से ग्वालियर से करीब 20 किमी दूर शनि भगवान मंदिर और परिसर में अंचल के सभी प्रसिद्ध ऋषियों और संतों की प्रतिमा लगाई जायेंगी। इन प्रतिमाओं को ग्वालियर के मूर्तिकार दीपक विश्वकार्मा और उनकी टीम तैयार कर रही हैं। अभी कुछ ऋषियों की मूर्तियां तैयार हो गयी है। शनिदेव के परिसर में जो मूर्तियां लगाई जायेंगी।
ऋषियों की प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा
आपको बता दें कि मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा सप्त ऋषि कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि, वसिष्ठ, गालव ऋषि, भिंडी ऋषि, करह महाराज (पटियावाले बाबा), रतनदास जी महाराज ,लखनदास जी महाराज, जयरामदास जी महाराज, नागाजी महाराज, पोरसा, जोधाराम जी महाराज, लोचनदास जी महाराज , जमदागिनी जी महाराज, दंदरौआ महाराज, श्री श्री 1008 चाद्रमादास जी महाराज बना रहे हैं। रामपथ गमन के लिये 30 फीट ऊंची भगवान की राम की मूर्ति मिंट पत्थर से तैयार की थी। जो कि छत्तीसगढ के रामपथ गमन की शोभा बढ़ा रही है। भगवान राम वनबास के दौरान जहां -जहां पर रूके थे वहीं-वहीं पर राम की मूर्तियों को छत्तीसगढ के पर्यटन विभाग द्वारा़ स्थापित किया जा रहा है। अभी हाल ही मुरैना के राधिका चौराहा पर 18.5 फीट ऊंचा अशोक स्तम्भ स्थापित किया जायेगा। दीपक विश्वकर्मा 8 साल की उम्र से मूतियां बना रहे है। दीपक को राष्ट्रपति, राज्य सरकार से कई पुरूस्कार प्राप्त कर चुके है। भारतीय संस्कृति को देश बाहर स्पेन, पैरिस, इटली और दुबई में प्रदर्शित कर चुके है।
5 माह से मूर्तियां हो रही है तैयार
यह मूर्तियां तैयार करने के लिये पिछले 6 माह से लगातार लगे हुए है। यह मूर्तियां ग्वालियर के मिंट पत्थर से तैयार की जा रही है। यह सभी मूर्तियां एक ही साइज में रहेंगी। लेकिन सभी की मुद्रा अलग-अलग रहेगीं। इसके लिये बहुत ही बारीकी से काम किया जा रहा है। जो मूर्तियां अभी तैयार हो गयी है। उनको रीजनल आर्ट एंड क्राफ्ट डवलपमेंट सेंटर के परिसर में रखा गया है।
शनिलोक परिसर में 2 साल लगेंगे
शनिदेव के इस परिसर को तैयार होने करीब 2 साल का समय लगेगा। इसके लिये वहां पर तेजी से काम चल रहा है। इसके लिये 4 द्वार तैयार किये जा रहे है। इन द्वार पर महादेव, भगवान श्रीराम और अन्य देव की मूर्तियां लगाई जायेंगी। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के रूकने के लिये स्थान को भी तैयार किया जा रहा है। इसके लिये वहां पर एक काफी बड़े हिस्से पार्किंग का भी निर्माण किया जा रहा है। जिसमें विशेष आयोजन के वक्त श्रद्धालुओं की भीड़ से जाम नहीं लगे। परिसर में फोटो लेने के लिये विशेष स्थान तैयार किया जा रहा है और साथ ही पूरे परिवार और उसके आसपास हरियाली को बढ़ाने के लिये अलग-अलग प्रजाति के सैकड़ों पौधे लगाये जायेंगे। जिससे वातावरण भी शुद्ध रहे और गर्मी में अन्य जगहों से भी तापमान कर रहें। शनि भगवान के दर्शन करने में श्रद्धालुओं को परेशानी नहीं आये उसके लिये भी व्यवस्था की जायेगी। । उस पूरे हिस्से को रैनोवेट कर तैयार किया जायेगा वह पूरा प्रांगण एक जैसा दिखाई देगा। मंदिर परिसर में स्थित शनि कुण्ड को जगह बनाया जायेगा। जिसमें महिला और पुरूषों के स्थान की अलग-अलग व्यवस्था रहेगी।

