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नारायणबिहार कॉलोनी अतिक्रमण के मामले में हाईकोर्ट ने किया कमिश्नर नियुक्त , जांच में पता लगायेंगे 80 फीट सड़क कितनी है बची

ग्वालियर. नारायणबिहार कॉलोनी में सड़क पर अतिक्रमण के विवाद में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रूख अपनाचा है। हाईकोर्ट ने कागजी रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए मौके की वास्तविक स्थिति को जााने के लिये एक सीनियर एडवोकेट को कमिश्नर नियुक्त किया है। अब यह जांच तय करेगी कि 80 फीट चौड़ा मार्ग वास्तव में मौजूद है कि नहीं। केवल दस्तावेजों में ही सीमित है। यह मामला नारायणबिहार कॉलोनी के इंडस्ट्री एरिया में सड़क पर अतिक्रमण से जुड़ा हुआ है। सरकारी रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सड़क पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त है। टीम के निरीक्षण में जमीनस्तर पर कोई अवरोध नहीं मिला। याचिकाकर्ता ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई थी।
याचिकाकर्ता ने बताया है कि जमीन हकीकत सरकारी रिपोर्ट से अलग है। सड़क पर अब भी अतिक्रमण बना हुआ है। जिससे वाहनों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। उनके एडवोकेट ने हाईकोर्ट को बताया है कि लीज डीड ने मुताबिक फैक्ट्री तक 80 चौड़ी सड़क होना अनिवार्य है। लेकिन स्टेटस रिपोर्ट में इस महत्वपूण्र बिन्दु का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। हाईकोर्ट ने रिपोर्ट में 80 फीट चौड़ाई का स्पष्ट जिक्र नहीं होने पर सवाल उठाये थे। राज्य पक्ष भी इस सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाये। जिससे तथ्यात्मक विवाद और गहरा गया है। इसी को देखते हुए हाईकोर्ट ने निष्पक्ष जांच के लिये हस्तक्षेप किया है।
क्या है मामला
नारायण विहार कॉलोनी के इंडस्ट्री एरिया में सड़क पर अतिक्रमण होने से फैक्ट्री तक पहुंच प्रभावित होने की शिकायत याचिका में की गई। प्रशासन की ओर से कोर्ट में पेश स्टेटस रिपोर्ट में दावा किया गया कि संबंधित सड़क से अतिक्रमण हटा दिया गया है और अब वहां सामान्य आवाजाही हो रही है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि पहले अतिक्रमण था तो उसे 26 अक्टूबर 2025 को हटा दिया गया था। निरीक्षण के दौरान फोटो और पंचनामा भी प्रस्तुत किए गए।
तहसीलदार करेंगे जांच में सहयोग
कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता केएन गुप्ता को कमिश्नर नियुक्त किया है। वे सभी पक्षों की मौजूदगी में मौके का निरीक्षण करेंगे। कोर्ट ने ग्वालियर कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि तहसीलदार स्तर के अधिकारी को जांच में सहयोग के लिए नियुक्त किया जाए और निरीक्षण के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। कमिश्नर को 30 अप्रैल तक अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी। उनकी फीस 20 हजार रुपए याचिकाकर्ता द्वारा वहन की जाएगी। कलेक्टर को निरीक्षण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

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