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आउटसोर्स कर्मचारियों के हवाले नगर निगम, 55% ज्यादा अस्थाई कर्मचारी, नियमित कर्मचारियों को कई-कई जिम्मेदारी

नगर निगम में 7,020 कर्मचारी कार्यरत हैं।

ग्वालियर. शहर की समस्याओं का समाधान करने वाला नगरनिगम स्वयं कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। स्थाई अधिकारी और कर्मचारियों की कमी की वजह से न सिर्फ विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि आम लोगों के काम भी समय पर पूरे नहीं हो पा रहे है। वर्तमान में नगरनिगम की कई अहम सेवायें आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे संचालित की जा रही है।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने नगरनिगम में कर्मचारियों की कमी को दूर करने के निर्देश दे चुकी है। लेकिन इसके बावजूद स्थाई भर्ती की प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। स्थिति यह है कि बिजली, पानी, सफाई व्यवस्था और कर वसूली जैसे अहम विभागों में बड़ी संख्या में अस्थाई कर्मचारी काम कर रहे हैं।
55%  व्यवस्था आउटसोर्स कर्मियों के सहारे
वर्तमान में नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक निगम में कुल 7,20 कर्मचारी कार्यरत है। इनमें से 1600 कर्मचारी नियमित है, जबकि 2450 विनियमित और 2970 कर्मचारी आउटसोर्स व्यवस्था के तहत कार्यरत है। यानी निगम के लगभग 55 प्रतिशत से ज्यादा व्यवस्था अस्थाई कर्मचारियों के सहारे चल रही है। स्थाई भर्ती नहीं होने का असर अब निगम के कामकाज और जनसेवाओं पर साफ दिखाई देने लगा है।
सरकार प्रस्तावों पर ध्यान नहीं देती-एमआईसी सदस्य
नगर निगम एमआईसी सदस्य अवधेश कौरव ने कर्मचारियों और अधिकारियों की कमी को गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि पर्याप्त स्थायी स्टाफ होने से काम की गुणवत्ता और जवाबदेही दोनों में सुधार होगा। उन्होंने भर्ती प्रस्ताव को लेकर कहा कि निगम की ओर से प्रस्ताव भेजे जाते हैं, लेकिन शासन स्तर पर उन पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता।
शासन को भेजी गई जानकारी-आयुक्त
नगर निगम आयुक्त संघप्रिय ने बताया कि भर्ती के लिए जरूरी जानकारी शासन को भेजी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि पदोन्नति से जुड़े मामलों का हाईकोर्ट में लंबित विवाद समाप्त होना जरूरी है। इसके बाद रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी और शासन स्तर पर चयन एजेंसी के माध्यम से नियुक्तियां कराई जाएंगी। फिलहाल ग्वालियर नगर निगम सीमित संसाधनों और अस्थायी कर्मचारियों के सहारे शहर की व्यवस्थाएं संभाल रहा है। वहीं आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े विवाद और नियुक्तियों पर उठते सवालों के बीच शहरवासियों की नजर अब स्थायी भर्ती प्रक्रिया शुरू होने पर टिकी है।

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