20 करोड़ रूपये की हवेली बनने में 5 वर्ष और गिराने में 6 घंटे लगे, दादागिरी ऐसी इनके बिना कोई व्यापार नहीं होता

छतरपुर. कोतवाली थाने पर पथराव के 2 घंटे के अन्दर सरकार ने यहां 20 हजार स्क्वायर फीट में बनी 20 करोड़ रूपये की 3 मंजिला हवेली को जमींेदोज कर दिया। हवेली परिसर में खड़ी 3 लग्जरी कारें, फॉर्च्यूनर, सफारी और स्कॉर्पियो को भी बुलडोजर ने कुचल दिया है। आपको बता दें कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बिना परमिशन के 5 वर्षो से जब यह हवेली बन रही थी तब सरकारी अमले को क्यों कुछ दिखाई नहीं दिया। इसका जबाव है। इस खानदार का रसूख, हवेली के मालिक हाजी शहजाद, आजाद, फैयाज और इम्तियान इन चारों भाईयों का इस शहर में ऐसा दखल है कि उनकी मर्जी के बिना कोई यहां व्यापार नहीं कर सकता है।

आपको बता दें कि पुलिस ने शहजाद और उसके भाईयों को 1 अगस्त को थाने पर पथराव के मुख्य आरोपियों के तौर पर नामजद किया है। एफआईआर के अनुसार चारों भाईयों ने भीड़ को पुलिस पर हमला करने के लिये उकसाया था। फिलहाल चारों भाई और उनका परिवार गायब है। पुलिस सरगर्मी से उनको तलाश रही है। लेकिन 22 अगस्त की रात तक उनका कोई पता-ठिकानों नहीं मिल पाया है। जब उनकी हवेली गिराई जा रही थी। तब भी उनके परिवार का कोई सदस्य यहां मौजूद नहीं था। शहजाद अली और उसके भाईयों की राजनीतिक दखल भी था।
जमीन से लेकर पारिवारिक झगड़े भी सुलझाता था शहजाद
शहजाद अली और उसके चारों भाई अलग-अलग व्यापार से जुड़े है। बड़ा भाई आजाद अली नगरपालिका का पार्षद है। शहजाद स्वयं जिला कांग्रेस का पूर्व उपाध्यक्ष रह चुका है। बाकी दोनों भाई जमीन, रेत, पुराने टायर और ऑयल का व्यापार करते थे। उनका ऐसा कब्जा था कि दूसरा व्यक्ति इस धंधे में एंट्री नहीं कर सकता था। स्थानीय लोगों के अनुसार हाजी शहजाद अपनी अदालत में ही बिरादरी के लोगों के प्रॉपर्टी और पारिवारिक झगड़े से जुड़े फैसले सुनाता था। इसमें कई केस आपराधिक भी होते थे। वह जिसके पक्ष में फैसला सुनाता था। उससे गरीबों की मदद करने के नाम पर पैसे भी लेता था। शहजाद मुस्लिम अंजुमन इस्लामिया कमेटी का सदर भी रह चुका है। कमेटी का पिछला चुनाव वह जावेद से हार चुका है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि वह जरूरतमंदों का बड़ा मददगार है। उसकी गाड़ी पर लगी प्लेट में कांग्रेस उपाध्यक्ष्ज्ञ लिखा हुआ था। सूत्रों के अनुसार वह कांग्रेस नेता मुन्ना राजा उर्फ शंकर प्रतापसिंह का नजदीकी रहा है। दिग्विजय सिंह शासनकाल में शंकरप्रताप सिंह को-ऑपरेटिव के अध्यक्ष रहे हैं।

