डीआरडीओ की बायोडाइजेस्टर मार्क-II प्रौद्यागिकी का महाराष्ट्र मेट्रो में इस्तेमाल
ग्वालियर. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन जो कि भारत सरकार और महाराष्ट्र सरकार की एक संयुक्त उद्यम कंपनी हैए ने जल संरक्षण और पर्यावरण की रक्षा के लिए अब संयुक्त रूप से प्रयास करने का निर्णय लिया है। डीआरडीओ की ग्वालियर स्थित प्रयोगशाला डीआरडीओ द्वारा विकसित इको.फ्रेंडली बायो डाइजेस्टर प्रौद्योगिकी मार्क .।। का इस्तेमाल अब महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की इकाइयों में होगा। इस उद्देश्य हेतु दोनों संगठनों के मध्य 05 जनवरी 2021 को पुणे में आपसी समझ के ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत अब डीआरडीओ महाराष्ट्र मेट्रो रेल नेटवर्क में मानव मल के निस्तारण हेतु बायोडाइजैस्टर प्रौद्योगिकी मार्क .।। की स्थापना हेतु तकनीकी सहायता प्रदान करेगा।
मूल रूप से इस प्रौद्योगिकी का विकास हिमालय के सियाचिन और लेह.लद्दाख जैसे उच्च पर्वतीय बर्फीले इलाकों के लिए किया गया थाए जहां मानव मल का निस्तारण एक बड़ी समस्या रही है। इस एमओयू के तहत डीआरडीओ द्वारा विकसित बायोडाइजैस्टर महाराष्ट्र मेट्रो के समस्त स्टेशनों में लगाये जायेंगे। डॉ एके सिंह, विशिष्ट वैज्ञानिक एवं महानिदेशक (जैवविज्ञान) डीआरडीओ और डॉ ब्रजेश दीक्षित, प्रबंध निदेशक, महाराष्ट्र मेट्रो रेल निगम लि (एमएमआरसीएल) ने अपने संगठनों की ओर से एमओयू का आदान.प्रदान किया।
एमओयू के आदान.प्रदान के दौरान डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.एके गुप्ता एवं डॉ अनुराग पांडेय विशेष रूप से मौजूद थे। यह जानकारी डॉ. परितोष मालवीय ने दी।

