एसपी की जनसुनवाई में ऑक्सीजन का गैस सिलेंडर पहुंचा घायल पिता को बेटा, सुनवाई नही हुई तो पिता को एसपी ऑफिस के दरवाजे पर लिटाऊंगा

ग्वालियर. बिजली खंभे पर बिजली आपूर्ति बहाल करने के दौरान झुलसे लाइनमैन हरिओम शर्मा को न्याय दिलाने के लिये दर-दर भटक रहा उनका बेटा हिमांशु मंगलवार को एसपी की जनसुनवाई में ऑक्सीजन का गैस सिलेंडर लेकर पहुंचा। हिमांशु का कहना है कि हादसे को लगभग 4 माह निकल चुके है। लेकिन अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की गयी है।
लाइनमैन के बेटे हिमांशु ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अब भी उनकी शिकायत पर कार्यवाही नहीं की गयी तो वह गंभीर रूप से झुलसे पिता हरिओम शर्मा का ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ सीधे एसपी कार्यालय लाकर लिटा देंगे। वह बताते हैं कि सिलेंडर लेकर कई पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट चुका है। बस अब और चक्कर नहीं लगा सकता। एसपी ऑफिस के बाहर सुरक्षा कर्मियों ने युवक को सिलेंडर छींना और उसे जनसुनवाई में भेजा । पीडित परिवार ने बिजली विभाग केअधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
28 अप्रैल को झुलसे थे हरिओम
परिजनों के मुताबिक 28 अप्रैल 2026 का हजीरा के बिरलानगर स्थित खाटू श्याममंदिर के पास लाइन नम्बर 1 पर ड्यूटी के बीच हरिओम शर्मा गंभीर विद्युत हादसे में झुलस गये थे। हादसे में वह बुरी तरह से झुलस गये थे। परिवार का आरोप है कि बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की वजह से यह घटना घटी। हादसे के बाद से हरिओम शर्मा की हालत गंभीर बनी हुई है। उन्हें लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ रही है।
इन अधिकारियों-कर्मचारियों पर लगाए आरोप
परिवार ने बिजली विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। इनमें
प्रीति बरैया — उपमहाप्रबंधक, STM
रोहित सिंह — प्रबंधक, बिरला नगर जोन
शशांक कुलश्रेष्ठ — सहायक प्रबंधक, STC
मोहसिन बेग — सब-स्टेशन ऑपरेटर
शामिल हैं। परिवार का आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था में कथित लापरवाही के चलते हरिओम शर्मा हादसे का शिकार हुए। धारा 304 में FIR की मांग पीड़ित परिवार ने मामले में विद्युत विभाग के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ BNS/IPC की धारा 304 के तहत FIR दर्ज करने की मांग की है। परिवार चाहता है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।परिवार का कहना है कि गंभीर हालत में हरिओम शर्मा को लगातार इलाज और ऑक्सीजन की जरूरत है। ऐसे में पुलिस से जल्द कार्रवाई की उम्मीद है, ताकि उन्हें न्याय के लिए बार-बार थाने और अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

