Newsमप्र छत्तीसगढ़

एडवोकेट की गलती की सजा याचिकाकर्ता को नहीं, सोशल ऑडिट का संदेश देकर याचिका बहाल -हाईकोर्ट

ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में न्यायिक संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का अनोखा उदाहरण पेश किया है। हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि वकील की गलती की सजा याचिकाकर्ता को नहीं दी जा सकती है। मामला गोविंद स्वरूप श्रीवास्तव की याचिका से जुड़ा है। जो सुनवाइर्ह के दौरान उनके वकील के उपस्थित न रहने की वजह से खारिज हो गयी थी। बहाली के लिये दिया गया आवेदन भी सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया था।
राहत का फैसला मिला डिवीजन बेंच से
इस आदेश को चुनौती देने पर डिवीजन बेंच ने पाया कि एडवोकेट दूसरी अदालत में व्यस्त होने की वजह से पेश नहीं हो पाये थे। ऐसे में याचिकाकर्ता के अधिकारों को प्रभावित करना न्यायसंगत नहीं है। हाईकोर्ट ने पूर्व आदेशों को निरस्त करते हुए याचिका को पुनः बहाल करने के निर्देश दिये थे।
‘सजा’ नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी की शर्त
हालांकि, अदालत ने याचिका बहाल करते हुए एक विशेष शर्त भी जोड़ी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता या उसका वकील माधव अंध आश्रम जाकर कम से कम 2 हजार रुपए की खाद्य सामग्री प्रदान करे और वहां के बच्चों व जरूरतमंदों के साथ कम से कम एक घंटा समय बिताए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह शर्त दंड नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन है। कोर्ट ने ‘सोशल ऑडिट’ की अवधारणा को बढ़ावा देते हुए कहा कि समाज के जिम्मेदार लोगों को समय-समय पर ऐसे संस्थानों का निरीक्षण करना चाहिए, ताकि वहां रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *