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नवसवंत्सर का आगाज भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर किया स्वागत

ग्वालियर. रौद्रनाम नवसंवंत्सर महोत्सव सवंत 2083 का सुबह तड़के 5 बजे गुडीपडवा का पूजन कर समारोह का शुभारंभ किया गया है। इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। सुबह 6 बजे भगवान भास्कर का ेमंत्रोच्चारण के अर्घ्य दिया गया । इस मौके पर हवन का भी आयोजन किया गया था। हवन की समाप्ति के बाद पूर्व महापौर विवेक नारायण शेजवलकर ने उपस्थित जनसमूह को शुभकामनायें दी।


रौद्रनाम नवंसंवत्सर स्वागतोत्सव में गुरूवार की सुबह 4.40 बजे जल बिहार में संकीर्तन यात्रा, सुबह 4.40 बजे गीत ज्योतिकलश छलके, सुबह 5.01 बजे दीप प्रज्वलित एवं गुड़ी पूजन प्रातः 5.15 बजे सर्वधर्म प्रार्थना जैन वाणी, सूर्यस्तुति प्रातः 5.18 बजे सुप्रभात गायन, सुबह 5.31 बजे निवेदन गीत-इतनी शक्ति हमें देना, सुबह 5.31 बजे संकल्प गीत-हम करें राष्ट्र आराधन, बुरहानपुर के गजानन वारूडे सुबह 5.36 बजे शहनाई वादन, ग्वालियर के सुबह 6 बजे बांसुरी वादन-रवीन्द्र कुलश्रेष्ठ, सुबह 6.10 बजे ग्वालियर के कलाकारों द्वारा तुरही वादन, सुबह 6.24 बजे मंत्रोच्चारण, सुबह 6 बजे भगवान भास्कर को अर्घ्य, सुबह 6.45 बजे आगोमोनी, सुबह 7 बजे लोक वाद्ययंत्रों द्वारा कचहरी, प्रातः 7.20 बजे से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं 8.30 बजे वंदे मातरम् की प्रस्तुति दी गयी।

भारत पर ईश्वर की कृपा बनी रहने की प्रार्थना की

हिंदू नव वर्ष को विभिन्न राज्यों में गुड़ी पड़वा, उगादी और चेटी चंद जैसे नामों से जाना जाता है। कार्यक्रम के दौरान वर्तमान वैश्विक तनाव (अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध) के माहौल को देखते हुए भारत पर ईश्वर की कृपा बनी रहने की भी प्रार्थना की गई। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति हुई और हवन-पूजन के साथ लोगों ने हिंदू नव वर्ष का स्वागत किया। इस दिन का मूल भाव नई शुरुआत, नई ऊर्जा और जीवन में सकारात्मकता का स्वागत करना है। यह शुभ दिन नौ दिनों तक चलने वाले चैत्र नवरात्रि उत्सव की शुरुआत का भी प्रतीक है। ऐसी भी मान्यता है कि भगवान राम का राज्याभिषेक समारोह भी इसी दिन संपन्न हुआ था।

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