भारत आने में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से कितने दिन लगते हैं ड्रोन और मिसाइलों से इन्हें कौन बचायेगा

नई दिल्ली. भारत के लिये तेल और गैस का बड़ा हिस्सा अभी पारस की खाड़ी (पर्सियन गल्फ) से लाया जाता है। यह सब जहा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संकरे समुद्र के रास्ते से निकलते है। अगर कोई तेल टैंकर या भारतीय जहा इस स्ट्रेट से निकलते हुए गुजरात के कांडला बंदरगाह या मुंबई पहुंचना चाहे तो कितना समय लगेगा? कितनी दूरी है? और सबसे आवश्यक है मिसाइल -ड्रोन हमलों के बीच यह जहाज सुरक्षित कैसे आयेंगे।

कितनी दूरी और कितना समय लगेगा
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाहर निकलने के बाद गुजरात के कांडला बन्दरगाह तक करीब -करीब 1000किमी की दूरी है। मुंबई तक यह दूरी लगभग 1450-1560 किमी तक है। तेल टैंकर आमतोर पर 24-31 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से चलते है। औसत गति 27.78 किमी प्रतिघंटा माने तो कांडला पहुंचने में करीब 37 घंटे यानी डेढ़ दिन लगेंगे। मुंबई पहुंचने में लगभग 53 घंटे दिन यानी 2 दिन से अधिक ज्यादा वक्त लग सकता है। दरअसल, में मौसम, लोड और रूट के हिसाब से यह समय 2-3 दिन तक हो सकता है। यह जहाज बहुत भारी होते हैं। इसलिये तेज नहीं चलते, लेकिन लगातार चलते रहते हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों का यातायात कौन कंट्रोल करता है
यह स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच है। इसका सबसे संकरा हिस्सा सिर्फ 21-33 किमी चौड़ा है। यातायात को अंर्तराष्ट्रीय समुद्री कानून और इंटरनेशनल मेरीटाइम ऑर्गनाईजेशन के ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम के तहत काबू किया जाता है। लेकिन असल में ईरान की नौसेना और इस्लामिक रिलॉवशनरी गार्ड कॉर्प (आईआरजीसी) इस इलाके पर मजबूत पकड़ रखती है। ओमान दक्षिणी हिस्से को देखता है। अमेरिका की फिफ्थ फलीट भी यहां सुरक्षा के लिये तैनात रहती है। सामान्य दिनों में हर दिन 80-130 जहाज गुजरते हैं। लेकिन तनाव के समय ईरान इसे ब्लॉकक र सकता है।

भारतीय जहाजों को कौन सुरक्षित ले जायेगा
भारत सरकार और भारतीय नौसेना इस वक्त बहुत सतर्क है। 28-36 भारतीय झंडे वाले जहाज (जिनमें तेल और एलएनजी टैंकर शामिल) अभी फारस की खाड़ी में फंसे हुए है। सरकार ने कहा है कि भारतीय नोसेना युद्धपोत भेजकर इन जहाजों को एस्कॉर्ट दे सकती है।
पहले भी ऑपरेशन संकल्प के तहत नौसेना ने भारतीय जहाजों की सुरक्षा की थी। अभ्भी भी उच्चस्तर पर चर्चा चल रही है कि नौसेना के जहाज टैंकरों के साथ चलेंगे। उन्हें स्ट्रेट से बाहर निकालेंगे। 778 भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिये 24 घंटे कंट्रोल रूम काम कर रहा है।
भारत ऊर्जा का सुरक्षा का रास्ता
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भारत के जीवन रेखा है। यहां से तेल न आया तो पेट्रोल के दाम बढ़ेंगे। अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। सरकार, नौसेना और शिपिंग कम्पनियां मिलकर काम कर रही है। आम नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। जहाजों को सुरक्षा के पूरे इंतजाम हो रहे हैै। अगर स्थिति और बिगड़ी तो वैकल्पिक रूट जैसे चाबहार बन्दरगाह का उपयोग बढ़ाया जा सकता है। लेकिन फिलहाल नौसेना का एस्कॉर्ट सबसे बड़ास भरोसा है।
मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचते हुए भारत कैसे पहुंचेंगे?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खतरा मिसाइल, ड्रोन और छोटी नावों से है. ईरान ने चेतावनी दी है कि दुश्मन देशों के जहाज पर हमला होगा. बचने के मुख्य तरीके ये हैं…
नौसेना का एस्कॉर्ट: भारतीय नौसेना या अमेरिकी युद्धपोत आगे-पीछे चलेंगे, ड्रोन और मिसाइल को मार गिराएंगे.
ओमान की तरफ रूट: जहाज जितना हो सके ओमान के पानी में रहकर चलेंगे जहां ईरानी खतरा कम है.
न्यूट्रल सिग्नल: कुछ जहाज अपना मालिक देश (जैसे चीन या तुर्की) दिखाकर गुजर गए. लेकिन भारतीय जहाजों के लिए नौसेना एस्कॉर्ट सबसे सुरक्षित है.
तेज निगरानी: रडार और हवाई कवर से हमलों का पता लगाकर जवाब दिया जाता है.

