बावरिया गैंग की महिलायें ही ई-रिक्शा में हो चोरियों को अंजाम दे रही थी, 11 मेम्बरों की गैंग में 3 महिलायें 3 पुरूष, सभी आपस में रिश्तेदार

ग्वालियर. डबरा पुलिस ने ग्वालियर-चम्बल इलाके में ऑटो और ई-रिक्शा में चोरी करने वाले गैंग का खुलासा किया है। 27 अप्रैल को मुरैना जिले के बानमोर से 11 आरोपियों को हिरासत में लिया है। इनमें 3 पुरूष और 8 महिलायें शामिल है। आरोपी यूपी, एमपी, हरियाणा और राजस्थान के निवासी है। आरोपी बावरिया कोई गैंग नहीं एक समुदाय की छवि अपराधों की वजह से खराब हुई हे। दरअसल, बावरिया कोई गैंग नहीं एक समुदाय का नाम हैं यह समुदाय राजपूत वंश से संबंध रखता है। लेकिन इनके अपराध करने की प्रवृत्ति ने अनुसूचित जाति की कैटेगरी में डाल दिया है। डबरा थाने के एएसआई से बात कर गैंग के बारे में जाना है। इसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
गैंग का ठिकाना बानमोर में
शुरूआत में दोनों टालमटोल करती रहीं, लेकिन लेडी कांस्टेबल की सख्ती के बाद उन्होंने गैंग के बार में जानकारी दी। महिलाओं ने बताया है कि वह बावरिया गैंग की मेम्बर है। उनका ठिकानों मुरैना के बानमोर में है। जहां गैंग के अन्य सदस्य रहते हैं। इसके बाद एसआई ने एसएसपी धर्मवीर सिंह को बताया है कि पुलिस टीम बानमोर पहुंच कर 27 अप्रैल की रात 9 और मेम्बरों को गिरफ्तार किया है। इनमें 3 पुरूष और 6 महिलायें शामिल है। जांच में सामने आया है कि गैंग के तार एमपी के कई जिलों और राजस्थान से जुड़े है। कॉल डिटेल और लोकेशन से भी कंफर्म हुई कि घटना के वक्त गैंग के मेम्बर आसपास ही मौजूद रहते थे।

पुरूष और महिलाओं के गैंग लीडर अलग-अलग
पुलिस ने बताया है कि गैंग के मेम्बर आपस में रिश्तेदार होते हैं। जिससे विश्वास बना रहता है। पुरूष और महिलाओं अलग-अलग लीडर है। पुरूष का नेतृत्व वकीला उर्फ सोनू आदिवासी है, जबकि महिला गैंग की लीडर शांतिदेवी, निवासी आगरा है। गैंग छोटे-छोटे समूहों में बटकर काम करता है। महिलायें रैकी और चोरी करती है। जबकि पुरूष भागने में सहयोग करते है। गैंग में पति-पत्नी, भाई-भाभी, बहू, मौसी और भतीजे-भतीजी शामिल है। रिश्तेदार होने से आपसी विवाद कम होते हैं। सदस्य अलग-अलग प्रदेशों में सक्रिय रह सकते है। पुलिस के मुताबिक ग्वालियर जिले में ई-रिक्शा में हो रही चोरियों के पीछे यही गिरोह था।
ई-रिक्शा में चोरी से खुला मामला
24 अप्रैल 2026 की शाम करीब साढ़े चार बजे, डबरा थाने में सब-इंस्पेक्टर संजय शर्मा गश्त से लौटे ही थे कि राधा कोरी नाम की महिला रोते हुए पहुंची। पानी पिलाने के बाद उसने बताया कि वह ई-रिक्शा से अपने मायके जा रही थी।
रिक्शा में पहले से बैठी दो महिलाओं ने उससे बातचीत शुरू की। स्टॉप पर उतरने के बाद जब उसने बैग चेक किया, तो उसमें रखी चांदी की करधोनी और 2 हजार रुपए गायब थे। पुलिस ने तुरंत टीम सक्रिय की। कुछ देर बाद सूचना मिली कि संदिग्ध महिलाएं पिछोर चौराहे पर हैं। करीब एक घंटे में पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया। पूछताछ में उन्होंने अपने नाम पूनम आदिवासी और शांति आदिवासी, निवासी मुरैना बताए। उनके पास से चोरी का सामान बरामद हुआ।

